कर्नाटक: 111 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही BJP, 5 हजार से भी कम मार्जिन से जीते 42 प्रत्याशी

नई दिल्ली,

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 224 में से 135 सीटों पर जीत दर्ज की है. पार्टी को 43 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ है. कांग्रेस की इस धुआंधार जीत के बाद इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने चुनाव में जीत के अंतर का विश्लेषण किया. इस विश्लेषण में पता चला कि कांग्रेस ने 2018 की तुलना में काफी सीटों पर आराम से जीत दर्ज की, लेकिन कुछ सीटें ऐसी भी थीं, जहां जीत का अंतर बेहद कम रहा. इन सीटों पर थोड़ा सा भी नुकसान होने पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार हो सकती थी.

2018 के विधानसभा चुनाव से तुलना की जाए तो इस बार कम अंतर से जीत वाली सीटों की संख्या 12 ज्यादा है. इन सीटों पर बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला. इनमें जीतने वाले प्रत्याशी और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच का अंतर 5 हजार वोटों से भी कम है. इस बार 42 ऐसी सीटें थीं, जो कुछ हजार वोट इधर से उधर होने पर जीतने वाले कैंडिडेट के हाथ से निकल सकती थीं. इन सीटों में से कांग्रेस को 22, भारतीय जनता पार्टी को 17 और बाकी तीन सीट जनता दल (सेक्युलर) को मिली हैं. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में 30 सीटें ऐसी थीं, जिनमें जीत का अंतर 5 हजार वोटों से कम था.

12 सीटों पर जीत का अंतर 1 हजार से भी कम
कांग्रेस ने इस बार जो सीटें जीती हैं, इनमें से 12 पर जीत का अंतर एक हजार वोटों से भी कम है. दिलचस्प बात यह है कि इन सभी सीटों पर दूसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी रहे हैं. बेंगलुरु क्षेत्र की जयनगर सीट पर तो कांटे की टक्कर देखने को मिली है. यहां भाजपा से मैदान में उतरे सीके राममूर्ति ने कांग्रेस विधायक सौम्या रेड्डी को 16 वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया. इस साल आए कर्नाटक के नतीजों में यह जीत का सबसे कम अंतर है. 2018 के चुनावों में सबसे कम जीत का अंतर 213 वोटों का था.

इस बार कांग्रेस की जीत रही निर्णायक
कर्नाटक में कुल 8 सीटें ऐसी थीं, जिसमें जीत का अंतर 1 हजार से भी कम रहा. इनमें से 3 मध्य कर्नाटक और 2 बेंगलुरु क्षेत्र की हैं. 2018 के पिछले चुनावों की तुलना में कांग्रेस ने 2023 के चुनाव में निर्णायक जनादेश के साथ जीत हासिल की. पार्टी ने 20 हजार से ज्यादा वोटों के भारी अंतर के साथ 63 सीटों पर जीती है. 2018 में ऐसी सीटों की संख्या 20 थी.

ग्रामीण सीटों पर कांग्रेस का रहा दबदबा
शनिवार को आए नतीजों से यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी ने ग्रामीण सीटों पर अपना वर्चस्व स्थापित किया है. ऐसी 97 में से 74 सीटों पर कांग्रेस ने 10 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है, जबकि पिछले चुनाव में इन सीटों की संख्या 23 थी.

डीके शिवकुमार ने लगाई बड़ी छलांग
सभी सीटों के आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस को सबसे भारी जीत प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार की सीट पर मिली है. डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार भी हैं. शिवकुमार कनकपुरा निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में थे और 1.2 लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीत गए. इस सीट से ही 2018 में भी डीके शिवकुमार ने जीत दर्ज की थी. हालांकि, तब जीत का अंतर 79 हजार वोटों के करीब था. पिछले चुनाव के नतीजे की तुलना इस बार के नतीजे से की जाए तो शिवकुमार ने इस बार करीब 44,000 वोटों की छलांग लगाई है.

95 सीटों पर अंतर 20 हजार से ज्यादा
कर्नाटक के नतीजों के विश्लेषण में यह बात भी सामने आई है कि बीजेपी 111 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही है. इनमें से 103 सीटें कांग्रेस ने जीती हैं और 73 सीटों पर जीत का अंतर 10 हजार से ज्यादा रहा है. कुल मिलाकर, राज्य में 95 सीटों पर प्रत्याशियों की जीत 20 हजार से ज्यादा वोटों से हुई है. इनमें से आधी से ज्यादा सीटें मुंबई-कर्नाटक और ओल्ड मैसूरु क्षेत्र की हैं. ज्यादातर सीटों के इलाके ग्रामीण हैं.

आठ सीटों पर नोटा को मार्जिन से ज्यादा वोट
नतीजों में ऐसी 8 सीटें भी सामने आई हैं, जिनमें जीत का अंतर नोटा को मिले वोट से कम है. इनमें से पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गई हैं. जबकि, तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. 2018 में ऐसी सात सीटें थीं, जिनमें से 6 कांग्रेस के खाते में गई थीं और बाकी 1 पर बीजेपी को जीत मिली थी.

 

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