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केजरीवाल-KCR को न्योता नहीं, कर्नाटक CM के शपथ ग्रहण में कांग्रेस ने किसे-किसे बुलाया?

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बेंगलुरु,

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का फैसला हो गया. सिद्धारमैया एक बार फिर सीएम की शपथ लेंगे. कांग्रेस ने डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम के लिए मना लिया. डिप्टी सीएम के साथ-साथ डीके शिवकुमार लोकसभा चुनाव तक कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे. चार दिन तक चले मंथन के बाद सीएम चेहरा तय हुआ तो शपथ समारोह की तारीख का भी ऐलान कर दिया गया.

20 मई को दोपहर 12.30 बजे बेंगलुरु में शपथ समारोह होगा. इसके लिए पार्टी ने जोर-शोर से तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. इस कड़ी में देशभर की तमाम पार्टियों के नेताओं को भी निमंत्रण देने के लिए लिस्ट तैयार हो गई है. हालांकि इस लिस्ट में दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के सीएम केसीआर समेत कई नामों को शामिल नहीं किया गया है. वहीं बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम ने सिद्धारमैया सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की बात कही है.

इन नेताओं को दिया गया निमंत्रण
– बिहार के सीएम नीतीश कुमार
– बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव
– तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन
– झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन
– पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती
– सीपीआई के महासचिव डी राजा
– सीपीआई (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी
– बंगाल की सीएम ममता बनर्जी
– एनसीपी प्रमुख शरद पवार
– महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे
– अभिनेता और एमएनएम प्रमुख कमल हासन

इन नेताओं को नहीं दिया गया निमंत्रण
– केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन
– दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
– आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी
– तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर

बता दें कि कांग्रेस ने 10 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की है. पार्टी को 224 सीटों में से 135 सीटों पर जीत मिली है. राज्य से भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया है. बीजेपी 66 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर आई. जबकि जेडीएस को सिर्फ 19 सीटें मिलीं. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से कांग्रेस में राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कवायद तेज हो गई थी.

कौन हैं सिद्धारमैया?
कर्नाटक के मैसूर जिले के वरुणा होबली में एक गरीब किसान परिवार में 12 अगस्त 1948 को सिद्धारमैया का जन्म हुआ. उनका बचपन गरीबी में बीता. उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़कर मवेशियों को तक चराया था. हालांकि उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और बीएससी की डिग्री हासिल की. वह 1978 में तालुका विकास बोर्ड के सदस्य बने. उन्होंने 1980 में मैसूर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन जीत दर्ज नहीं कर पाए. 1983 में लोकदल के टिकट से चामुंडेश्वरी विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने के बाद उनके राजनीतिक करियर की रफ्तार बढ़ी.

2013 में पहली बार बने कर्नाटक के मुख्यमंत्री
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक में कांग्रेस की जात के बाद सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने गरीबों और वंचितों के लिए कई तरह की योजनाओं का ऐलान किया. उन्होंने अपने पहले बजट में ही चुनावी घोषणापत्र में किए गए 165 में से 60 वादों को पूरा किया. दूसरे बजट में अन्य 30 वादों को पूरा किया गया. इसके बाद एक-एक कर सभी चुनावी वादों को पूरा किया गाय. 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन सरकार बनी, लेकिन यह गठबंधन ज्यादा चल पाया और सरकार गिर गई थी. इसके बाद सिद्धारमैया को कर्नाटक में विपक्ष का नेता चुना गया.

 

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