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माकपा MLA की मदद से SFI ने यूनिवर्सिटी इलेक्शन में किया बड़ा घपला, चुनाव स्थगित

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तिरुवनंतपुरम

आखिरकार केरल यूनिवर्सिटी को स्टूडेंट यूनियन के चुनाव को स्थगित करने का फैसला करना पड़ा। विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में भाग लेने के योग्य एक प्रतिनिधि की जगह स्टूडेंट फेडेशन ऑफ इंडिया (SFI) के एक अयोग्य छात्रा का नाम भेजा गया। कहा जा रहा है कि एक मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक की सह पर एसएफआई ने यह घपला किया। यह धोखाधड़ी तिरुवनंतपुरम स्थित क्रिश्चियन कॉलेज में सामने आई। एसएफआई से जुड़े इस घपले का पता चलने के बाद यूनिवर्सिटी ने गुरुवार को चुनाव स्थगन का ऐलान किया।

विश्वविद्यालय ने उसके तहत आने वाले सभी कॉलेजों में चुनाव प्रक्रिया की पूरी जांच करने का फैसला किया है। यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेज के प्रिंसिपलों को स्क्रूटिनी के लिए छात्र संघ चुनाव कराने से संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा गया है। ध्यान रहे एसएफआई उसी राजनीतिक दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की छात्र इकाई है जिससे जुड़ा एक विंग पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बैन हो चुका है।

क्रिश्चियन कॉलेज कटकडा में विभिन्न पदों के लिए कॉलेज यूनियन चुनाव होने के बाद बुधवार को काउंसलर पद पर जीत हासिल करने वाले दो छात्रों में से एक को बदलने की बात सामने आई थी। कॉलेज से जीतीं दो काउंसलर अरोमल और अनेका थीं। मानदंड के अनुसार, केरल विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के काउंसलर के रूप में जीतने वाले उम्मीदवार, केरल विश्वविद्यालय संघ के चुनाव के लिए मतदान करते हैं।

जब क्रिश्चियन कॉलेज ने अपनी काउंसलर की सूची भेजी तो अनेका की जगह एसएफआई के एक और शीर्ष नेता विशाक का नाम आया, जिन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। इसके कारण बड़े पैमाने पर विरोध हुआ और कांग्रेस की छात्र शाखा केएसयू ने राज्य के पुलिस प्रमुख को एक लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ प्रतिरूपण का मामला दर्ज करने की मांग की। अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक सीपीआई(एम) विधायक कथित रूप से इस आपराधिक कृत्य के पीछे था। उसी पार्टी के दूसरे विधायक उनकी पोल खोल दी। यह दशार्ता है कि पार्टी की तिरुवनंतपुरमजिला इकाई में सब कुछ ठीक नहीं है। माकपा ने छात्र नेताओं को मीडिया से बात न करने की सलाह दी है क्योंकि वे जानते हैं कि चीजें बद से बदतर हो सकती हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस पर टिकी हैं। छात्र नेताओं के अलावा क्रिश्चियन कॉलेज के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी भी संकट में पड़ सकते हैं।

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