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‘रावण और बाबर नहीं मिटा सके सनातन…’, उदयनिधि के बयान पर CM योगी का पलटवार

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लखनऊ

सनातन धर्म पर विवादित टिप्पणी करने के मामले की सरगर्मी कम होती नजर नहीं आ रही है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन पर टिप्पणी करने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन पर जमकर हमला बोला है। योगी ने कहा कि जो सनातन रावण, कंस, बाबर और औरंगजेब से नहीं मिटा, उसे एक तुच्छ सत्ता परजीवी जीवों से क्या मिट पाएगा। उन्होंने कहा कि आज उन्हें स्वयं अपने कृत्यों पर लज्जित होना चाहिए। योगी ने सनातन पर टिप्पणी को सूरज पर थूकने वाला बताया और कहा कि सनातन धर्म भारत की राष्ट्रीयता का प्रतीक है।

योगी ने कहा कि आजकल अपनी विरासत के प्रति समाज की दृष्टि को कमतर करने का कुत्सित प्रयास हो रहा है लेकिन ये सब लोग भूल गए कि जो सनातन नहीं मिटा था रावण के अहंकार से, जो सनातन नहीं मिटा था कंस के हुंकार से, जो सनातन नहीं मिटा था बाबर और औरंगजेब के अत्याचार से वह सनातन इन तुच्छ सत्ता परजीवी जीवों से कहां मिट पाएगा? आज उनको स्वयं अपने कृत्यों पर लज्जित होना चाहिए। योगी ने कहा कि सनातन धर्म मानवता का धर्म है। उस पर उंगली उठाने का मतलब मानवता को संकट में डालने का कुत्सित प्रयास है। याद करिए दुनिया का कौन सा ऐसा मत-मजहब या संप्रदाय है जिसके संकट के समय पलक-पांवड़े बिछाकर सनातन धर्म और धर्मावलंबियों ने उनकी सुरक्षा और संरक्षण का कार्य न किया हो।

योगी ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम विशिष्ट हैं। कोई धर्म सनातन धर्मावलंबी कभी यह नहीं कहता है कि हम विशिष्ट हैं या हम ही सब कुछ हैं। कभी नहीं कहा। हमने तो कहा ‘एकम् सत्य विप्रा बहुधा वदंति’ सत्य एक है और विद्वान लोग उसको अलग-अलग अलग-अलग तरह से देखते हैं। अलग-अलग रास्ते से उसका अनुसरण करते हैं। इन सब के बावजूद भी अगर किसी को समझ में नहीं आता है और वह अपनी मूर्खता वश सूर्य की तरफ थूकने का प्रयास कर रहा है तो सूर्य तक उसका थूक नहीं पहुंचेगा। उसके सिर पर स्वयं गिरेगा और इससे उसके आने वाली पीढ़ी को लज्जित होना पड़ेगा।

योगी ने कहा कि हमें भारत की परंपरा पर गौरव की अनुभूति करना चाहिए। दुनिया को मानवीय कल्याण पर चलने वाली प्रेरणा देने के लिए सनातन धर्म की परंपरा पर गर्व करना चाहिए। यह भारत की राष्ट्रीयता का प्रतीक है। भारत को एक नई प्रेरणा देने का माध्यम है। दुनिया के अंदर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला माध्यम बनता है और यही कारण है कि आजादी के अमृत महोत्सव से उपरांत अमृत कल के प्रथम वर्ष में जब भारत जी-20 के देशों का प्रतिनिधित्व मोदीजी के नेतृत्व में कर रहा है तो उसका थीम भी वसुधैव कुटुंबकम का दिया है।

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