मैं सीएम नहीं, प्रगति और विकास का उम्मीदवार हूं… सिंधिया ने अटकलों पर लगाया विराम

भोपाल

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। उनमें सबसे अधिक है कि वह सीएम पद के दावेदार हैं। इस सवाल पर वह कई बार जवाब दे चुके हैं। वहीं, भोपाल में आयोजित एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में सीएम बनने को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया से फिर सवाल किया गया है। उन्होंने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि मैं सीएम नहीं, प्रगति और विकास का उम्मीदवार हूं।

वहीं, 2018 विधानसभा चुनाव को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मेरे अंदर एक ज्वालामुखी थी। मुझे लगता था कि मैं इससे कुछ बेहतर कर सकूंगा। लेकिन 15 महीने में ही लूट खसोट की सरकार स्थापित कर दी। साथ ही मेरी आशा और अभिलाषा पर पानी फेर दिया। बार-बार वादाखिलाफी हो रही थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उस चुनाव में मेरा जो भी योगदान रहा। इसके बाद मुझे बुलाकर कहा गया कि फलाने व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद मैंने कहा कि ठीक है आप बनाइए। मैंने कह दिया कि आज जाकर समर्थन करूंगा। मेरे परिवार के साथ क्या हुआ ये सभी लोग जानते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मैं सीएम पद की रेस में न कल था और न आज हूं। विकास और प्रगति का उम्मीदवार जरूर हूं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट बहुमत के साथ एमपी में इस बार बीजेपी की सरकार बन रही है। वहीं, एमपी में बीजेपी के चेहरे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है कि हमारा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। शिवराज सिंह चौहान हमारे मुख्यमंत्री हैं। 18 साल में उनके नेतृत्व में विकास हुआ है। हमलोग उनके ही सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं।

समर्थकों की वापसी पर दिया बयान
वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस में आने वाले नेता लौटने लगे हैं। इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मेरे साथ आने वाले लोगों ने बलिदान दिया था। आज के जमाने में सरपंच अपना सरपंची भी नहीं छोड़ता है। मेरे साथ आए छह लोग पंद्रह साल बाद मंत्री बने थे। सभी लोग इतना बड़ा त्याग कर मेरे साथ आए थे। ऐसा तो था नहीं कि आज इस्तीफा दिया और कल शपथ ले लिए। वह चुनाव जीतकर वापस आए। उपचुनाव में 29 सीटों पर हुई थी। उनमें 28 कांग्रेस की झोली में थी। उसमें से 19 सीटें कांग्रेस हार गई तो आप किस वजूद की बात कर रहे हैं।

इसके साथ ही टिकट को लेकर चुनाव नजदीक आते ही आया राम गया राम शुरू हो जाता है। बीजेपी में क्षमता के आधार पर ही टिकट मिलता है। चाहे वह कोई भी हो। लोगों टिकट की चाह में जा रहे हैं। उनके साथ भी मेरी शुभकामना है। बीजेपी में कभी ऐसा नहीं होता है कि आप आ गए हैं तो चुनाव लड़ते रहेंगे। आप भले ही 40 साल से यहां क्यों नहीं हैं।

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