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‘सरकारें आएंगी जाएंगी… लेकिन यह देश रहना चाहिए,’ पुरानी संसद से आखिरी भाषण में मोदी को याद आए अटल

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद के विशेष सत्र में लोकसभा की पुरानी यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया। दरअसल पुरानी संसद से यह पीएम मोदी का आखिरी भाषण था। पीएम मोदी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस भाषण का जिक्र किया, जो अटल का ऐतिहासिक है।’ उन्होंने कहा, ‘इसी सदन में एक वोट से अटल जी की सरकार चली गई थी और आज छोटे-छोटे दलों ने इस लोकतंत्र को खूबसूरत बनाया है। पीएम मोदी ने अटल जी के भाषण के कुछ अंश का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सरकारें आएंगी जाएंगी, पार्टियां बनेंगी बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश रहना चाहिए।’

अटल का ऐतिहासिक भाषण
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 31 मई 1996 को संसद में दिया गया भाषण भारतीय लोकतंत्र का सबसे शानदार और जानदार भाषण है। दरअसल 31 मई 1996 को संसद में उनकी सरकार के खिलाफ रखे गए विश्वास मत पर चर्चा हो रही थी। अटल जी ने अपने भाषण में कहा था, ‘सरकारें आएंगी-जाएंगी मगर ये देश और उसका लोकतंत्र रहना चाहिए।’ उनकी यह बात भारतीय लोकतंत्र में हमेशा गूंजती रहेंगी। अटल जी ने अपने सिद्धांतों के चलते अपनी सरकार की कुर्बानी दे दी थी। 1996 में अटल जी को सिर्फ 13 दिन की सरकार चलाने का मौका मिला था।

देश आज संकटों से घिरा है और ये संकट हमने पैदा नहीं किए हैं, जब-जब कभी आवश्यकता पड़ी, संकटों के निराकरण में हमने उस समय की सरकार की मदद की है, सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए

पीएम मोदी ने नेहरू से मनमोहन तक का जिक्र किया
पुराने संसद भवन में लोक सभा में अपना आखिरी भाषण देते हुए सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर अपने पूर्ववर्ती पीएम मनमोहन सिंह के योगदान को सराहते हुए राष्ट्र निर्माण में सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को याद किया।

पीएम मोदी ने 14-15 अगस्त, 1947 को आधी रात में संविधान सभा में जवाहर लाल नेहरू द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ को याद करते हुए कहा कि पंडित नेहरू का वह भाषण हम सबको प्रेरित करता रहेगा। पीएम मोदी जब जवाहर लाल नेहरू के भाषण और योगदान को याद करते हुए उनकी प्रशंसा कर रहे थे, उस समय सत्ता पक्ष की तरफ से मेज थपथपाकर उनके तारीफ का समर्थन किया जा रहा था लेकिन कांग्रेस सांसदों की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया गया। ऐसे में कांग्रेस के तालियां नहीं बजाने पर कटाक्ष करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कुछ बातें ऐसी हैं जो हर किसी की ताली की हकदार है, लेकिन इसमें भी राजनीति आड़े आ रही है। जब नेहरू के योगदान को याद किया जा रहा हो तो भला कौन उसे नहीं मानेगा।

इस सदन से विदा लेना भावुक पल है
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में दोनों सदनों को मिलाकर 7,500 के लगभग जनप्रतिनिधि (सांसद) जिसमें 600 के लगभग महिला जनप्रतिनिधि भी शामिल रही है, ने देश के निर्माण में अपनी अपनी भूमिका निभाई है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर शास्त्री,अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह तक बड़ी श्रृंखला रही है जिन्होंने देश का नेतृत्व किया है। आज का दिन इन सबके गुणगान करने का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज हम इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं। इस सदन से विदा लेना भावुक पल है।

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