‘नीतीश का NDA में लौटना नुकसानदेह’, दीपांकर भट्टाचार्य ने JDU-BJP दोस्ती को लेकर किया बड़ा खुलासा, सियासी हलचल तय

पटना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में लौटने के कदम को नुकसानदेह करार देते हुए कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) को फिर से अपने पाले में करने के प्रति भाजपा की आतुरता यह दर्शाती है कि उन्हें इस बात का अहसास है कि राज्य में जीत हासिल करने के लिए ‘राम मंदिर’ काफी नहीं है। भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये गये एक साक्षात्कार में दावा किया कि बिहार में महागठबंधन के सत्ता में रहने के दौरान वहां गरीबी और आजीविका के मुद्दों को केंद्र में रखकर एक वैकल्पिक एजेंडा आकार ले रहा था, जिससे भाजपा घबरा गई।

नीतीश पर कटाक्ष
भाकपा(एमएल) लिबरेशन के महासचिव ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से बिहार की चुनावी राजनीति पर असर पड़ने को तवज्जो नहीं देने की कोशिश करते हुए कहा कि लोगों ने देखा कि इस कार्यक्रम का ‘राजनीतिकरण’ कर दिया गया था। भट्टाचार्य ने दावा किया कि लोगों का कहना है कि यदि भगवान राम चुनाव जीतने के लिए काफी हैं तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नीतीश कुमार की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बेशक, भाजपा जानती है कि यह काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर लोगों को प्रभावित करेगा… लेकिन भगवान राम में आस्था रखने वाले लोगों को राम मंदिर का राजनीतिकरण बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।

राम मंदिर पर राजनीति
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का इस्तेमाल भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने के लिए किया। यही कारण था कि शंकराचार्य इससे दूर रहे थे। नीतीश के ‘इंडिया’ गठबंधन छोड़ने के बारे में भट्टाचार्य ने कहा कि संभवतः भाजपा ने सोचा होगा कि विपक्षी एकता की शुरुआत बिहार से हुई है…ऐसे में, नीतीश कुमार को (राजग में) वापस लाकर वे अपनी स्थिति मजबूत कर लेंगे। वाम नेता ने कहा कि लेकिन मुझे लगता है कि यह नुकसानदेह साबित हुआ है। बिहार की राजनीति में अभी यदि कोई नेता सबसे कम विश्वसनीय है तो वह नीतीश कुमार हैं।

नीतीश ने गलत किया-दीपांकर
उन्होंने कहा कि शायद,भाजपा नीतीश कुमार को (राजग में) इसलिए वापस लाना चाहती थी कि उसे एहसास हो गया था कि एक नया एजेंडा शुरू हो गया है…‘जातिगत गणना, गरीबी और आरक्षण पर जोर’… बिहार में एक वैकल्पिक एजेंडा ने आकार लेना शुरू कर दिया। भाजपा इससे डर गई है और वह इसे रोकना चाहती थी। वाम नेता ने दावा किया कि देश के साथ-साथ बिहार में भी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है और राज्य में 64 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 10,000 रुपये से कम है। उन्होंने भाजपा पर बिहार में बुलडोजर राज, दमनकारी सरकार और विभाजनकारी सांप्रदायिक राजनीति के उत्तर प्रदेश मॉडल को लागू करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोगों को मुफ्त भोजन नहीं चाहिए। उन्हें नौकरी चाहिए। किसान कह रहे हैं कि हमें किसान सम्मान निधि नहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी चाहिए।

जन विश्वास रैली
यह पूछे जाने पर कि क्या नीतीश के नेतृत्व वाली जदयू) बाद में विपक्षी महागठबंधन में लौट सकती है, भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने जो किया है वह आत्मघाती है। उन्होंने जो किया, उसके बाद मुझे नहीं लगता कि उनका राजनीतिक करियर अब ज्यादा बचा है। उन्होंने कहा कि तीन मार्च को हमारी पटना में जन विश्वास रैली है। यह बहुत बड़ी रैली होने जा रही है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर चीजें काफी व्यवस्थित हैं और (सरकार के खिलाफ) गुस्सा बढ़ा है। भट्टाचार्य ने कहा कि शुभकरण सिंह की मौत और किसानों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उससे आक्रोश बढ़ रहा है। लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के कम से कम पांच सीट पर चुनाव लड़ने की खबरों के बीच, भट्टाचार्य ने कहा कि बातचीत अंतिम चरण में है और इसे तीन मार्च से पहले अंतिम रूप दे दिये जाने की संभावना है।

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