80-20 पर डील, सिंगरौली-प्रयागराज हाईवे पर बने 2500 मुआवजे वाले घर, बड़े अधिकारी और नेताओं ने भी खरीदी जमीन

सिंगरौली:

मध्य प्रदेश के सिंगरौली से प्रयागराज तक हाईवे का निर्माण होना है। हाईवे निर्माण के लिए सर्वे का काम पूरा हो गया है। सिंगरौली-प्रयागराज हाईवे का 70 किमी हिस्सा सिंगरौली जिले में आता है। फोरलेन हाईवे पास होने के बाद मुआवजा रैकेट सक्रिय हो गया है। यह रैकेट मुआवाजे वाले घर का निर्माण करवाता है। सांकेतिक घरों का हाईवे रूट पर निर्माण करवा यह रैकेट सरकार से मोटी रकम मुआवाजे के रूप में वसूलती है। सिंगरौली जिले में इसके लिए बकायादा दलाल तक सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इसमें कई बड़े नेताओं और अधिकारियों ने भी जमीन खरीद रखी है। इसके साथ ही जमीन मालिक मकान बनवाने के लिए डील भी करते हैं। इस खुलासे के बाद जिले में हड़कंप मच गया है।

जमीन की खरीद बिक्री पर है रोक
दरअसल, मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के 33 गांवों को जोड़ते हुए प्रयागराज नेशनल हाईवे का सर्वे हो चुका है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से प्रयागराज को जोड़ने वाली लगभग 70 किलोमीटर से ज्यादा की हाईवे चितरंगी और दुधमनिया तहसील के 33 गांवों की जमीन हाईवे में फंस रही है। अधिग्रहण की सूचना मार्च में जारी हुई। इसके बाद जमीन की खरीद फरोख्त और नामांतरण पर प्रशासन द्वारा रोक लगा दिया गया है। साथ ही अनाउंसमेंट भी करवाया गया है। इसके लिए जगह-जगह पोस्टर भी लगाए गए हैं। अब यह जमीन नहीं खरीदी जा सकती है।

मकान निर्माण पर भी रोक
इसके साथ ही प्रशासन यह भी कह रही है कि इस जमीन पर मकान नहीं बनाए जा सकते हैं। फिर भी दोनों तहसीलों के गांव में एक महीने में लगभग 25 सौ से ज्यादा मुआवजा घर बनकर खड़े हो गए हैं। किसानों ने पैसे की कमी से निपटने के लिए मुआवजे का दूसरा अब गणित निकाल लिया है। लोग बताते हैं कि इसके लिए किसान बाकायदा स्टांप पेपर पर दूसरे राज्य के लोगों से निर्माण के आवास में 80% एवं 20% मुआवजा राशि देने का करार कर रहे हैं।

एनएचआई के पास पहुंची है शिकायत
मुआवजे वाले घर की शिकायत बाकायदा एनएचआई पीडब्ल्यूडी के पास पहुंची है। साथ ही स्थानीय प्रशासन भी यह स्वीकार कर रही है कि सर्वे पूरा होने के बाद भी बड़ी संख्या में घरों का निर्माण हुआ है। ये घर आधे अधूरे ही हैं। चितरंगी एसडीएम ने कहा है कि सर्वे के दौरान करीब 500 घर ही पड़ रहे थे। अब 2500 के करीब बन गए हैं। लोगों की दावे की जांच के बाद मुआवाजा की राशि दी जाएगी। सर्वे के बाद बनने वालों मकानों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

पावर कंपनियों का हब है सिंगरौली
सिंगरौली जिला पावर कंपनियों का हब माना जाता है। बाकायदा इससे पहले भी मुआवजे को लेकर एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह को जैसे ही पता चलता है कि इस इलाके में कोई कंपनी आने वाली है या सड़क का निर्माण होने वाला है। गिरोह के लोग सस्ते दाम में आदिवासी परिवारों से जमीन खरीद लेते हैं। उस पर बहुमंजिला इमारत खड़ी कर देते हैं। इसके बाद अधिग्रहण में मोटी रकम लेते हैं। इस रैकेट में कई बड़े लोगों की भी मिलीभगत है।

हाईवे में मुआवजे वाले घर का खुलासा
ताजा मामला चितरंगी के बड़कुड़ गांव का है, जहां पर नेशनल 135 सी हाईवे सड़क निकल रही है। यह सड़क 7 सौ 40 करोड़ की लागत से 70 किलोमीटर बननी है। उससे पहले ही मुआवजा पाने की नियत से वहां पर रातों-रात 2500 से ज्यादा मकान खड़े कर दिए हैं। नजदीक से देखने पर पता चलता है कि ये मकान अस्थाई हैं और सिर्फ मुआवजे के लिए टीन शेड डालकर बनाए गए हैं। इन मकानों में कोई रहता भी नहीं है।

2500 से अधिक मकान बन गए
एसडीम सुरेश जाथव इस बात को खुद मानते हैं कि सर्वे होने के बावजूद भी कई मुआवजे पाने की नीयत से कई मकान खड़े कर दिए हैं। चितरंगी एसडीम सुरेश जाधव का सख्त निर्देश है कि जो भी सर्वे के बाद मकान बने हैं, उन मकानों को बाकायदा जमींदोज कराया जाएगा और उन्हें मुआवजे से वंचित किया जाएगा।

अधिकारियों और नेताओं की जमीन
मुआवाजा पाने की रेस में कई बड़े अधिकारी और नेताओं के नाम भी पूर्व में आते रहे हैं। उस इलाके के कई बड़े नेताओं ने ऐसे प्रोजेक्ट आने से पहले उन इलाकों में जमीन खरीद लिए। सस्ती कीमतों में जमीन खरीदने के बाद मुआवजे के रूप में बड़ी राशि वसूलते हैं। इसके लिए सिंगरौली इलाके में दलाल भी सक्रिय हैं। वह किसानों से एग्रीमेंट साइन करवाकर लोगों को जमीन दिलवा रहे हैं। साथ ही मकान भी बनवा रहे हैं।

80 हजार रुपए डिसमिल है जमीन
गौरतलब है कि हाईवे का सर्वे जब नहीं हुआ था, तब इस इलाके में जमीन की कीमत आठ हजार रुपए डिसमिल होती थी। अब जमीन की कीमत 80 हजार रुपए हो गई है। मकान बनने के बाद मुआवजा ज्यादा मिलता है। दरअसल, मकान मालिक किसी एक्सपर्ट से अपने मकान का वैल्यूएशन करवाते हैं। इसमें मकान से लेकर बोर तक का हिसाब होता है। कम लागत में मकान मालिकों को मुआवजे की राशि ज्यादा मिल जाती है। अभी जो खुलासे हुए हैं, उसके मुताबिक स्थानीय किसान 80-20 की डील करते हैं। मुआवजे की राशि मिलने पर 80 फीसदी मकान बनाने वाले का और 20 फीसदी जमीन मालिक का हो जाता है। इस खुलासे के बाद पैसा निवेश करने वालों में हड़कंप मच गया है।

लंबे समय से चल रहा नेटवर्क
सिंगरौली में मुआवजे का रैकेट कोई नई बात नहीं है। यह लंबे समय से चल रहा है। सिंगरौली में दूसरे राज्यों के लोग भी बड़ी संख्या में आकर सस्ती कीमतों पर जमीन खरीदते हैं। फिर अधिग्रहण में जमीन जाने के बाद निवेश करने वाले को बड़ा फायदा होता है।

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