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एमपी में मौत और राजस्थान में अंतिम संस्कार, इस केंद्रीय मंत्री के संसदीय क्षेत्र में नहीं है मुक्तिधाम

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गुनाः

एमपी अजब है पर सबसे गजब है। ये आपने कई बार सुना होगा। इसी कड़ी में आज हम जिस गांव की कहानी आपको बता रहे हैं। उसे पढ़कर भी आप यही बोलेंगे। यह ऐसा गांव है जहां किसी की मौत होती है तो उसका दूसरे राज्य में अंतिम संस्कार होता है। लोग राज्य की बॉर्डर पार कर दूसरे गांव पहुंच अंतिम संस्कार की विधि पूरी करते हैं। लगा ना सुनकर अजीब। इससे भी हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह गांव ऐसे सांसद के संसदीय क्षेत्र में आता है जिसे जानकर आपको और हैरानी होगी।

दरअसल, पूरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना जिले का है। जहां जिले के बमोरी क्षेत्र के भोटूपुरा गांव में ऐसी स्थिति होती है। यहां मुक्तिधाम नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बॉर्डर पार एक लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। हाल ही में एक वृद्ध की मौत होने पर राजस्थान जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा।

राजस्थान जाकर करते हैं अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार बमोरी क्षेत्र के भोटूपुरा गांव के वृद्ध मूलचंद का बुधवार को निधन हो गया था। गांव में श्मशान घाट नहीं होने के चलते बॉर्डर पार कर राजस्थान ले जाया गया। जहां पर गांववालों ने वृद्ध का अंतिम संस्कार किया। यहां जाने के लिए लोगों को कच्चे रास्ते और पानी से भरा नाला पार करना पड़ा। जब लोग शव को लेकर पहुंचे तो दूसरी साइड के गांव वालों की नाखें तक नम हो आईं। लोगों ने कहा कि इस बार पानी कम था तो नाला पार कर गए। कई बार बाढ़ आने की स्थिति में पानी उतरने तक शव को घर में रखना पड़ता है।

अधिकारी हर बार देते हैं आश्वासन
भोटूपुरा गांव के निवासी हरविलास प्रजापति ने बताया कि गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण राजस्थान में जाना पड़ता है। काफी समय हो गया लेकिन गांव में मुक्तिधाम नहीं बन पाया है। अधिकारियों से कहते हैं तो वो सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं है।

मुक्तिधाम की राह है इतनी कठिन
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के मूलचंद की मृत्यु होने के बाद अंतिम संस्कार की समस्या हुई। साथ ही मुक्तिधाम जाने के लिए भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। जहां कच्चे रास्ते और पानी भरे नाले से निकलकर राजस्थान बॉर्डर पार के गांव में पहुंचे। आम दिनों में नाले में पानी नहीं होता है तो गांव में आसानी से पहुंच जाते है। लेकिन बारिश में कंधों पर शव लेकर जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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