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कैसे जान का दुश्मन बन गया मानसून सीजन? इस साल करीब 1500 लोगों की हुई मौत

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नई दिल्ली

देश में इस साल के मानसून मौसम के दौरान विषम मौसमी परिस्थितियों में कुल 1,492 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों से मिली। आंकड़ों से पता चला है कि मानसून के मौसम में बाढ़ और वर्षाजनित घटनाओं के कारण 895 लोगों की जान चली गई, जबकि आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 597 लोगों की मौत हो गई।”

भारी बारिश की घटनाएं 525 घटनाएं
आईएमडी ने बताया कि देश में 2024 के मानसून के दौरान 525 भारी वर्षा की घटनाएं (115.6 मिलीमीटर और 204.5 मिलीमीटर के बीच वर्षा) हुईं जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं और अत्यंत भारी वर्षा की घटनाएं (204.5 मिलीमीटर से अधिक) 96 रहीं। आंकड़ों के अनुसार, गर्मी के मौसम के शुरुआती दिनों में झारखंड में 13 और राजस्थान में चार लोगों की लू के चलते मौत हो गई। केरल में 30 जुलाई को पारिस्थितिकी रूप से नाजुक वायनाड जिले में विनाशकारी भूस्खलन हुआ तथा राज्य में बाढ़ और भारी बारिश के कारण 397 लोगों की मौत हुई।

असम में 102 लोगों की मौत
असम और मध्य प्रदेश में बाढ़ और भारी बारिश के कारण क्रमशः 102 और 100 मौतें हुईं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाढ़ और भारी बारिश के कारण 13 लोगों की मौत हुई। आंकड़े से यह भी पता चला कि मध्य प्रदेश में आंधी और बिजली गिरने से सबसे अधिक मौत (189) हुईं, उसके बाद उत्तर प्रदेश (138), बिहार (61) और झारखंड (53) का स्थान रहा।

मानसून का सीजन समाप्त
वर्ष 2024 का दक्षिण-पश्चिम मानसून मौसम आधिकारिक तौर पर सोमवार को समाप्त हो गया, जिसमें भारत में 934.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई – जो दीर्घावधि औसत का 107.6 प्रतिशत और 2020 के बाद से सबसे अधिक है। मध्य भारत में इस क्षेत्र के लिए दीर्घ-अवधि औसत से 19 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से 14 प्रतिशत अधिक और उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।

कहां, कितनी बारिश?
आंकड़ों के अनुसार, इसके विपरीत, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 14 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। देश में जून में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई, जुलाई में 9 प्रतिशत अधिक, अगस्त में 15.3 प्रतिशत और सितंबर में 11.6 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इस मानसून मौसम में केवल तीन मौसम विज्ञान उपखंडों में कम बारिश दर्ज की गई। भारत के भौगोलिक क्षेत्र को 36 मौसम विज्ञान उपखंडों में बांटा गया है। 21 उपखंडों में सामान्य बारिश दर्ज की गई, 10 में अधिक बारिश हुई और दो में बहुत अधिक बारिश हुई।

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