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दिनकर जयंती समारोहराष्ट्रकवि दिनकर आज भी प्रासंगिक – अनुराधा शंकर

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24 सितंबर, भोपाल।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी साहित्य गगन के सूर्य थे जिनके आलोक से आज भी सिहत्य जगत आलोकित हो रहा है। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे तथा कई भाषाओं का उन्हें ज्ञान था। वे पुर्तगाली भाषा भी जानते थे तथा अनेक पाश्चात्य कवियों की रचनाओं का उन्होंने अनुवाद भी किया। उनकी रचनायें आज भी प्रासंगिक है तथा हम सब के लिये प्रेरणा स्रोत हैं।

यह विचार पूर्व पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने गत दिवस दुष्यंत संग्रहालय सभागार में बिहार फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित दिनकर जयंती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किये। इस अवसर पर सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, सिद्धहस्त लेखक और व्यंग्यकार प्रियदर्शी खैरा, प्रशासन अकादमी के पूर्व अधिकारी श्री एच.एम. मिश्र सारस्वत वक्ता श्री संजय कुमार, बिहार फाउंडेशन के पदाधिकारी, पत्रकार तथा नागरिकगण उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि अनुराधा शंकर जी ने कहा कि बिहार पौराणिक युग से आज तक ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। चाहे वह सामाजिक क्रांति का क्षेत्र हो] साहित्य का क्षेत्र हो तथा नयी चेतना का क्षेत्र हो बिहार का सभी क्षेत्रों में योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आज कुछ राज्यों में बिहारियों को अपमानित किया जा रहा है यह उचित नहीं है। उन्होंने बिहार फांउडेशन के भोपाल चैप्टर को बधाई देते हुए कहा कि बहुत ही अच्छी पहल की है और इसकी निरंतरता बनाये रखें। उन्होंने कहा कि उनका और उनके कई साथियों का उन्हें सहयोग मिलता रहेगा।

अनुराधा शंकर जी ने कहा कि उनके दादा व महान कवि नागर्जुन के पास दिनकर जी आते थे और उनसे पारिवारिक संबंध थे। उन्होंने कहा कि बिहार में मैथली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका कई भाषायें व बोलियां हैं जिनसे हम कभी विलग नहीं हो सकते। आने वाली पीढ़ी से अपेक्षा है कि वे अपनी मातृभूमि व मातृभाषा को सदैव स्मरण रखें। प्रारंभ में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां सरस्वती की प्रतिमा व दिनकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की।

समारोह में अध्यक्ष पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने दिनकर जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि बिहार के चंपारण आंदोलन ने गांधी को गांधी बनाया और आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया। आगे चलकर देश स्वतंत्र हुआ। हम सभी बिहार के योगदान की अनदेखी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हमारे सभी महापुरुष श्रद्धा के पात्र है और एकजुट होकर उनकी जयंती मनानी चाहिए।

बिहार फाउंडेशन के प्रयास की उन्होंने सराहना की और दिनकर जी की प्रेरक पंक्तियों को उद्धृत किया। प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री प्रियदर्शी खैरा ने कहा कि कितना अच्छा होता कि सभी साहित्य संगठन मिलकर महानकवि की जयंती मनाते। उन्होंने फांउडेशन को इस कार्य के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा दिनकर आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कुरूक्षेत्र व रश्चिरथी की पंक्तियां भी उद्धृत की।

सारस्वत वक्ता श्री संजय कुमार ने अपने जोशीले भाषण में दिनकर जी की विभिन्न कृत्तियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृति के चार अध्याय प्रत्येक भारतीय को पढ़ना चाहिए। उन्होंने दिनकर जी की कई रचनाओं का उल्लेख किया और कहा कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में रहते हुए दिनकर जी अपनी मेघा के बल पर हिन्दी जगत के सूर्य बने। उन्हें प्रणाम।

बिहार फाउंडेशन के चेयरमेन श्री आर.एम.पी सिहं व कुंवर प्रसाद, संतोष सिंह ने पुष्पगुच्छ से अतिथियों का स्वागत किया। श्री सिंह ने अपने भाषण में फाउंडेशन के गठन और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन देश के 12 राज्यों में कार्यरत है और विदेशों के 14 देशों में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य बिहार की संस्कृति, कला और रहन-सहन का प्रचार करना और बिहार प्रवासियों में एकजुटता की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में हमारा योगदान है और आगे भी हम योगदान देते रहेंगे परन्तु हम सुरक्षित रहें, यही हम चाहते हैं।

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उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास समृद्ध है। रामायण और महाभारत काल के मनीषियों, स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों तथा साहित्य के क्षेत्र में आदि कवि वाल्मीकि से लेकर दिनकर जी तक सभी के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। कार्यक्रम का संचालन केन्द्रीय विद्यालय की सेवानिवृत्त पी.जी.टी. श्रीमती रागिनी सिंह ने किया और दिनकर जी की पंक्तियों को बीच-बीच में उद्धृत भी किया। प्रारंभ में संस्कार भारती अकादमी की बच्चियों ने ‘कलम आज उनकी जय हो’ का गायन किया। फाउंडेशन द्वारा अतिथियों को प्रतीक चिह्न भी भेंट किये गये। फाउंडेशन के सचिव संतोष कुमार ने अतिथियों, सभा में उपस्थित नागरिक, पत्रकार तथा दुष्यंत सभागार के प्रति सहयोग के लिये आभार ज्ञापित किया।

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