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पहले फूल बरसाए फिर दागी रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले, पुलिस और किसानों के बीच खींचतान

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नई दिल्ली

एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर 101 किसानों के जत्थे ने दिल्ली कूच की कोशिश की। हालांकि शंभू बॉर्डर पर सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर फूल बरसाए। लेकिन भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने कम से कम 50 आंसू गैस के गोले भी दागे। किसान नेताओं का आरोप है कि कई किसान इस दौरान घायल हो गए। कुछ किसानों के घायल होने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली की ओर अपना पैदल मार्च स्थगित कर दिया था।

प्रदर्शनकारी किसान हुए घायल
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि कम से कम 8 किसान घायल हुए हैं। एक किसान को चंडीगढ़ पीजीआई ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने बैठक के बाद जत्थे को वापस बुलाने का फैसला किया है। हमने शांतिपूर्ण तरीके से हरियाणा की ओर जाने की कोशिश की। लेकिन 101 किसान हरियाणा पुलिस का सामने करने लायक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रचार कर रही है कि हमारे पास हथियार हैं। पंढेर ने कहा कि कल संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा बैठक करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

किसानों पर पुलिस ने बरसाए फूल
पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर एक ओर पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी। किसानों के जत्थे ने बैरिकेडिंग तोड़ हरियाणा की ओर दाखिल होने की कोशिश की। इस खींचतान के बीच एक खास नजारा भी देखने को मिला। शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस ने फूल बरसाए।

फूल बरसाने के कुछ मिनट पर दागे रबर के गोले
किसानों पर फूल बरसाने के कुछ ही मिनट बाद पूरा नजारा बदल गया। किसानों ने नारेबाजी शुरू की। देखते ही देखते पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। आंसू गैस के गोले दागे जाने के कारण किसानों को कुछ मीटर पीछे हटना पड़ा। इनमें से कुछ किसानों ने अपने चेहरे ढके हुए थे और कुछ ने चश्मे पहने हुए थे। कुछ किसान जूट के गीले बोरों से आंसू गैस के गोलों से बचते दिखाई दिए।

रात से ही बॉर्डर पर पुलिस ने की तैयारी
शंभू बॉर्डर पर सुबह से ही किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। पुलिस ने रात में ही कई स्तर की बैरिकेडिंग लगा दी थी। किसानों ने ऐलान किया कि वे दोपहर 12 बजे दिल्ली की ओर पैदल मार्च शुरू करेंगे। पंजाब के सीमा क्षेत्र में आने वाले शंभू बॉर्डर पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी संख्या में तैनाती की गई है। दिल्ली के लिए निकले 101 किसानों के जत्थे को शंभू बॉर्डर पर रोक दिया गया। उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।

‘बिना पहचान किए किसानों को आगे नहीं जाने देंगे’
पुलिस ने दावा किया कि उनके पास किसान यूनियनों द्वारा उपलब्ध कराई गई 101 किसानों के नामों की एक सूची है, लेकिन प्रदर्शन कर रहे किसानों के नाम उस सूची में नहीं थे। मौके पर तैनात हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया, ‘हम पहले उनकी पहचान करेंगे और फिर उन्हें आगे जाने देंगे। हमारे पास 101 किसानों के नामों की एक सूची है, और वे यह लोग नहीं हैं। साथ ही, वे सामूहिक रूप से आगे नहीं बढ़ सकते क्योंकि स्थानीय (अंबाला) प्रशासन ने पैदल, वाहनों या किसी अन्य माध्यम से जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है।”

इलाके में इंटरनेट और मैसेज भेजने पर रोक
अंबाला जिले के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट और बल्क मैसेज भेजने पर रोक लगा दी गई है। जिला अधिकारियों ने पहले ही पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं और प्रशासन के आदेश पर सरकारी और निजी स्कूल दिन भर के लिए बंद कर दिए गए हैं। व्यवधान को रोकने के लिए, हरियाणा पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शंभू सीमा पर बहुस्तरीय बेरिकेड्स लगाकर पंजाब के साथ अंबाला की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी।

क्या है किसानों की मांगें?
‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (गैर-राजनीतिक) और ‘किसान मजदूर मोर्चा’ के आह्वान पर 101 किसानों के एक जत्थे ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए शुक्रवार को शंभू बॉर्डर स्थित अपने विरोध स्थल से दिल्ली के लिए मार्च शुरू किया था। प्रदर्शनकारी किसानों ने इससे पहले 13 फरवरी और 21 फरवरी को दिल्ली की ओर मार्च करने का प्रयास किया था लेकिन सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया था। किसान एमएसपी के अलावा कर्ज माफी, किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग कर रहे हैं। वे 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं।

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