9.9 C
London
Thursday, April 2, 2026
Homeराजनीतिजातीय जनगणना का विरोध करना वास्तव में राष्ट्रविरोधी, प्रोफेसर थोराट से चर्चा...

जातीय जनगणना का विरोध करना वास्तव में राष्ट्रविरोधी, प्रोफेसर थोराट से चर्चा में बोले राहुल गांधी

Published on

नई दिल्ली,

बाबासाहेब आंबेडकर ने 20 मार्च 1927 को महाड़ सत्याग्रह के ज़रिए जातिगत भेदभाव को सीधी चुनौती दी थी. इसी वजह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को शिक्षाविद और अर्थशास्त्री सुखदेव थोराट के साथ दलितों की शासन, शिक्षा, नौकरशाही और संसाधनों तक पहुंच और जातीय जनगणना के विषय पर चर्चा की है. इस बातचीत का एक वीडियो भी राहुल गांधी ने पोस्ट किया है, जिसमें वह जातीय जनगणना के महत्व के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

दलितों का अधिकार छीना गया
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि दलितों और पिछड़ों के पास जातीय जनगणना का संवैधानिक अधिकार है लेकिन ऐसा न करके उनका हक छीना जा रहा है. उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना न कराकर उनके साथ अन्याय हो रहा है. संविधान में सभी भारतीयों को एक समान अधिकार हासिल है और सबको बराबरी के साथ देखा जाता है लेकिन सरकार इसे स्वीकार नहीं करना चाहती.

सुखदेव थोराट ने कहा कि बाबासाहेब के प्रयासों से हमें संविधान में बराबरी का हक हासिल है. लेकिन फिर भी रीति-रिवाजों और धार्मिक विश्वास में बराबरी नहीं मिल पाई है और वहां उच्च जातियों का दबदबा है. उन्होंने कहा कि 2014 से 2020 के बीच दलित उत्पीड़न के 4 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं और हर साल ऐसे 14 हजार केस सामने आ रहे हैं. इसका बड़ा कारण है कि अनुसूचित जातियों तक संसाधनों की पहुंच नहीं है.

पिछड़ों का इतिहास मिटाया
राहुल गांधी के कहा कि बीजेपी और RSS ने दलित, आदिवासी और पिछड़ों के इतिहास को मिटा दिया है. इस पर प्रोफेसर थोराट ने कहा कि रिसर्च और पाठ्यक्रम उच्च जातियों के हाथ में हैं और वे दलितों या पिछड़ी जातियों के वास्तविक हालात के बारे में कभी नहीं लिखेंगे. इसी वजह से महाराष्ट्र ने दलित साहित्य का नेतृत्व किया जिसे बाद में उच्च जातियों को भी स्वीकार करना पड़ा. इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि लेकिन यह इतिहास आज भी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है और दिल्ली के स्कूल में पढ़ने वाले किसी भी लड़के या लड़की को इस बारे में नहीं पता क्योंकि वह मुख्य एजुकेशन सिस्टम का हिस्सा नहीं है.

राहुल गांधी ने कहा कि पिछड़ी जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए बीजेपी इस समाज के लोगों को सांसद या विधायक तो बना रही है लेकिन ऐसा प्रतिनिधित्व किसी मतलब का नहीं है क्योंकि उनसे वास्तविक शक्ति छीनी जा रही है. संस्थागत शक्ति जैसे नौकरशाही, कॉर्पोरेट और खुफिया एजेंसियों में पिछड़ी जातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.

जातीय जनगणना का विरोध राष्ट्र का विरोध
उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं और नौकरशाही पर किसका कब्जा है यह जानना एक मौलिक राष्ट्रवादी अभ्यास है. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि जातीय जनगणना का समर्थन न करना असल मायने में राष्ट्रविरोधी है. क्योंकि इससे साफ है कि आप देश की सच्चाई स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

Latest articles

Health Tips: विटामिन D की कमी से शरीर हो जाता है कमजोर और रहती है थकान, जानें दूर करने के उपाय

Health Tips: आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में अपनी सेहत के लिए किसी के...

Iran-US War: ईरान की पूरी लीडरशिप, नेवी… एयर फ़ोर्स और मिसाइलें सब खत्म, ट्रंप ने कहा- अब और बड़ा हमला करेंगे

वाशिंगटन डीसी। गुरुवार को US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (Iran-US War) के साथ...

सिग्नलिंग कार्य के चलते भोपाल मेट्रो की टाइमिंग फिर बदली

भोपाल। भोपाल मेट्रो की संचालन समय-सारिणी में एक बार फिर बदलाव किया गया है।...

मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी महंगी, 1 अप्रैल से गाइडलाइन दरों में औसतन 16% बढ़ोतरी

भोपाल। मप्र में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो गया है। सरकार ने...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...