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Wednesday, June 3, 2026
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तालिबान के राजदूत को दिल्ली आने की इजाजत देगा भारत? एक ही दांव से चीन-पाकिस्तान को चित करने का ‘प्लान’

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काबुल:

भारत और अफगान तालिबान के बीच रिश्ते हालिया समय में तेजी से बेहतर हो रहे हैं। भारतीय अधिकारियों और अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान के नेताओं के बीच कई बैठकें भी हुई हैं। अब इस कड़ी में एक बड़ा फैसला भारत की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ले सकती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को नई दिल्ली में अपना राजदूत नियुक्त करने की अनुमति भारत दे सकता है। ऐसा होता है तो यह भारत की ओर से तालिबान को मान्यता देने जैसा होगा। अभी तक ज्यादातर देश ऐसा करने से बचते दिखे हैं।

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को लगता है कि यह तालिबान का समर्थन करने का सही समय है। भारत अफगानिस्तान को अपने लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है और वहां प्रभाव बढ़ाना चाहता है। भारत के लिए ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चीन पहले ही तालिबान से रिश्ता बेहतर कर रहा है। चीन पहला देश है, जिसने तालिबान के राजदूत को मान्यता दी और अफगानिस्तान में कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश किया है। ऐसे में भारत भी अफगान तालिबान को राजदूत नियुक्त करने की इजाजत देकर संबंधों को बेहतर करने के लिए आगे बढ़ सकता है।

पाकिस्तान को झटका देने का मौका
भारत के पास अफगानिस्तान में चीन का मुकाबला करने के साथ पाकिस्तान पर बढ़त बनाने का भी मौका है। तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते कुछ समय से काफी खराब दौर में हैं। तालिबान ने पाकिस्तान से रिश्ता खराब होने के बाद दूसरे देशों से संबंध सुधारने पर जोर दिया है। काबुल की कोशिश चीन, रूस, भारत और दूसरे देशों के साथ रिश्ते बेहतर करने की है। ऐसे में भारत के पास अफगानिस्तान में पाकिस्तान को कमजोर कर अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका है।

भारत के लिए तालिबान के साथ संबंध सुधारने में खतरे भी हैं। भारत को अफगानिस्तान में शामिल होने से पहले इन खतरों पर ध्यान देना होगा। तालिबान के शासन में अफगानिस्तान आतंकवाद का अड्डा बन गया है। इस्लामिक स्टेट (IS) वहां तेजी से फैल रहा है और अफगानिस्तान में हमले कर रहा है। ये हमले तालिबान और उसके सहयोगियों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान (TTP) का समर्थन करने का भी आरोप है। TTP ने दावा किया है कि उसने फरवरी में ही पाकिस्तान की धरती पर 147 हमले किए, जिसमें 180 सैनिक मारे गए। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान आतंकवाद मुक्त हो। ऐसे में तालिबान के साथ आगे बढ़ने से पहले यह एक महत्वपूर्ण मांग होनी चाहिए। अस्थिरता की वजह से अफगानिस्तान में निवेश भी भारत को सोच समझकर करना होगा।

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