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राज्यसभा सदस्य किसी से नहीं डरते… रामगोपाल ने राधामोहन पर कसा तंज, सभापति ने ले लिए मजे

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लखनऊ:

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान जमकर सरकार और सत्ता पक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद में होने वाली बहसें कभी-कभी जनता में भ्रम पैदा करती हैं। इस दौरान उन्होंने पूर्व वक्ता डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल पर तंज कसा। दरअसल, राधामोहन लंबे समय तक गोरखपुर से विधानसभा पहुंचते रहे। यूपी चुनाव 2022 में सीएम योगी आदित्यनाथ के इस सीट से उम्मीदवारी के बाद वे बेटिकट हो गए। बाद में डॉ. अग्रवाल को राज्यसभा भेजा गया। इस पर प्रो. यादव ने तंज कसा कि डरकर यहां आ गए। इसी बयान पर राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आपत्ति जताई।

क्या है पूरा मामला?
प्रो. रामगोपाल यादव ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान अपने पूर्व वक्ता राधामोहन दास अग्रवाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमसे पहले जो वक्ता बोल रहे थे, ऐसा लग रहा था की जानें कितना प्रेम गरीब मुसलमान के लिए उनके मन में भरा है। सच्चाई कुछ और है। उनका संबंध अभी जो मुख्यमंत्री हैं, उनके साथ भी रहा। प्रो. यादव ने हंसते हुए कहा कि पहले उनके बारे में इसी तरह से बोलते रहे थे। बाद में कुछ बदल गया। अब डर कहें या कुछ और एक आदमी से लगने की वजह से यहां आ गए। प्रो. यादव ने इसके बाद लंबा भाषण दिया।

सभापति ने जताई आपत्ति
प्रो. रामगोपाल यादव का भाषण खत्म होने के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने हंसते हुए उनके मजे ले लिए। सभापति ने कहा कि प्रोफेसर साहब आपने एक बड़ी आपत्तिजनक बात कही है। आप डॉक्टर राधामोहन अग्रवाल जी की तरफ इशारा करके कहा कि एक व्यक्ति यहां डरकर आ गए। यह आपत्तिजनक है। भले ही उन्हें इस बयान पर आपत्ति न हो, लेकिन हमें इस पर गहरी आपत्ति है। मैं आपको कहना चाहता कि यहां (राज्यसभा) का कोई सदस्य डर नहीं सकता। डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल तो बिल्कुल भी नहीं डर सकते।

सभापति इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने प्रो. यादव के बयान पर कहा कि आपने उस व्यक्तित्व (योगी आदित्यनाथ) का महामंडन किया है। यह आपकी साजिश है। सोच-समझकर किया है। सभापति ने हल्के-फुल्के माहौल में कहा कि एक बात शुरुआत आपने कर दी है। आपने साफ कहा कि आपके प्रांत में एक ऐसी ताकत है, जिससे लोग यहां आते हैं, यही कहा है आपने। अब इस मसले पर राजनीति गरमाने लगी है।

10 साल बाद वक्फ का ख्याल
प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष से बार-बार जमीन और फंड की बात आती है। मुझे ऐसा लगता है कि 2014 से 2024 तक आपको 10 साल याद ही नहीं रहा कि कितनी बड़ी संपत्ति वक्फ बोर्ड के पास है। इतना पैसा उनके पास है। प्रो. यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जब आपने देश की सारी संपत्ति बेच ली। फिर देखा कि कहां बची हुई है? इसके बाद वक्फ का ख्याल आया। सपा सांसद ने कहा कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी निवास करती है। हम सभी को साथ लेकर, सबके सहयोग से ही आगे बढ़ सकते हैं।

प्रो. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में देख रहे हैं, लोग नमाज नहीं पढ़ सकते। अपने घर की छत पर नमाज नहीं पढ़ सकते। ईद के दिन सरकार की तरफ से क्या हुआ, सबने देखा। ईद के दिन जब लोग नमाज पढ़ रहे थे तो बाहर अधिकारी फोर्स के साथ खड़े थे। इस उन पर भरोसा नहीं करना उचित नहीं है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार ठीक को ठीक करना होगा। इस बिल को लागू करने के संकट को क्या आपलोगों ने ध्यान में नहीं रखा है।

बहस पर कही बात
प्रो. रामगोपाल यादव ने वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि संसद में कई बार ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों के वक्ताओं की बातों में सत्य और तर्क है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में बैठे लोग देश का नुकसान नहीं कर सकते, लेकिन सत्ता पक्ष के पास बड़ी जिम्मेदारी है। वे संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा को प्रभावित कर सकते हैं। रामगोपाल यादव ने अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय निवास करता है।

प्रो. यादव ने चेतावनी दी कि अगर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव की भावना उत्पन्न होती है, तो इससे देश में असंतोष फैलेगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया और जनता का विश्वास खो दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही चुनावी जीत हासिल हो जाए, लेकिन जब तक जनता का विश्वास नहीं होगा, तब तक सत्ताधारी दल की नीति पर प्रश्नचिह्न बना रहेगा।

संवैधानिक अधिकारों की कही बात
प्रो. रामगोपाल यादव ने संविधान के अनुच्छेद 13 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला कानून असंवैधानिक माना जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। रामगोपाल यादव ने विपक्ष के नेताओं की ओर से दिए गए भाषणों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संसद में विचार-विमर्श का स्तर उच्च होना चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष को अहंकार से बचने की नसीहत दी और कहा कि अहंकार किसी का भी सबसे बड़ा दुश्मन होता है।

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