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पाकिस्‍तान में बनेगा अलग सिंधुदेश! भारत के हमले की आशंका के बीच सिंध में जोरदार प्रदर्शन, जानिए क्यों चाहिए आजादी?

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इस्लामाबाद

भारत से तनाव के बीच पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अलग सिंधुदेश बनाने के लिए जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया है। लोग आपदा में अवसर तलाशने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि भारत के हमले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अलग अलग प्रांत के लिए पाकिस्तान से टूटकर अलग देश का निर्माण कर सकें। सिंधुदेश कि मांग का मतलब सिंधियों के लिए अलग मातृभूमि का निर्माण करना है, जहां लोगों के साथ कोई भेदभाव ना हो और पाकिस्तान की सेना उन्हें टॉर्चर ना करे। माना जा रहा है कि सिंधुदेश के निर्माण की मांग पाकिस्तान की सेना की दमनकारी नीतियों का परिणाम है, जिसपर पाकिस्तानी पंजाबियों का कंट्रोल है।

पाकिस्तानी पंजाबियों ने देश के बाकी हिस्सों में रहने वाले लोगों, जैसे बलूचिस्तान में बलूचों, सिंध प्रांत में सिंधी और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को सामाजिक और आर्थिक पैमाने पर हाशिये पर धकेल दिया है। सरकारी राजस्व का सबसे ज्यादा हिस्सा पंजाब पर खर्च किया जाता है, जबकि राजस्व देश के बाकी हिस्सों से जुटाए जाते हैं। आपको बता दें कि सिंधुदेश आंदोलन की शुरुआत 1950 के दशक में विवादित ‘वन यूनिट प्लान’ के तहत पाकिस्तान की राजनीति के केंद्रीकरण से हुई थी, जिसमें सिंध, बलूचिस्तान, पाकिस्तान पंजाब और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) को 1955 में वेस्ट पाकिस्तान का ‘सिंगल यूनिट’ करार दिया गया था और पूर्वी पाकिस्तान (पूर्वी बंगाल) को अलग सिंगल यूनिट बनाया गया था।

सेना करवाएगी पाकिस्तान के कई टुकड़े
जिस वक्त पूर्वी पाकिस्तान, यानि बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना क्रूरता कर रही थी, उस वक्त सिंध देश में भी पाकिस्तानी फौज आक्रामक अभियान चला रही थी। इस दौरान सिंध देश में एक अलग देश बनाने की मांग शुरू हो गई थी। सिंधी राष्ट्रवादी इस अवधि को अपने इतिहास का “सबसे काला युग” मानते हैं, क्योंकि इसी दौरान पंजाबी मुसलमानों ने सिंध प्रांत को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में ले लिया था। पाकिस्तान बनने के साथ ही सिंध देश बनाने की मांग शुरू हो गई थी। इस दौरान पंजाबी मुसलमानों ने सिंध के लोगों पर ऊर्दू थोप दिया, ऊर्दू में ही पढ़ाई लिखाई अनिवार्य कर दिया, जिससे सिंध के लोगों में भारी गुस्सा भर गया। लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना उनकी संस्कृति, उनकी पहचान और उनकी भाषा छीन रही है। वन-यूनिट योजना ने सिंध के लोगों की पहचान को बहुत खत्म कर दिया और ऊर्दू को अनिवार्य करने के बाद स्थिति और बिगड़ गई।

सिंध के लोगों को सरकारी नौकरी तभी मिल सकती है, जब उन्हें ऊर्दू आए। इन घटनाओं ने सिंधियों के बीच अलगाव की भावना को लगातार भड़काया है। गुलाम मुर्तजा सैयद, जिन्हें आधुनिक सिंधी राष्ट्रवाद का संस्थापक माना जाता है, उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर सिंध को विभाजित करने का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि कराची, जो सिंध की पहचना है, उसे अलग कर दिया गया और शहर को मुहाजिरों (भारत से गये मुसलमानञ) ने बर्बाद कर दिया है। विभाजन के बाद जो हिंदू भागकर भारत आ गये, उसका लाभ भी सिंध के लोगों को नहीं हुआ,क्योंकि उनकी संपत्तियों पर मुहाजिरों का कब्जा हो गया। इसके अलावा भारत से गये मुसलमानों को ऊर्दू आती थी, लिहाजा उन्होंने सिंध प्रांत के प्रशासन पर अपना कब्जा कर लिया।

पाकिस्तानी सेना के क्रूर रवैये के खिलाफ कई संगठनों ने सिंधुदेश की स्थापना की मांग शुरू कर दी और आज की तारीख में सिंधुदेश लिबरेशन आर्मी (एसएलए), जय सिंध कौमी महाज (जेएसक्यूएम), जय सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम), जय सिंध छात्र संघ (जेएसएसएफ) जैसे संगठन अलग सिंधुदेश की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तानी फौज ने हजारों सिंधी युवाओं को गायब कर दिया, जैसा उसने बलूचिस्तान में किया है। लिहाजा अब अलग सिंधुदेश बनाने की मांग ने जोड़ पकड़ लिया है, जिसका मकसद पाकिस्तान और पाकिस्तानी सेना से आजादी हासिल करना है।

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