नई दिल्ली,
गाजा संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संबंध बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं. इस मुद्दे पर दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं. बाइडेन की चेतावनी को नजरअंदाज़ करते हुए नेतन्याहू ने गाजा के रफाह में जमीनी सैन्य अभियान चलाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि हमारा हमले का पक्का इराद है. हमे को कोई रोक नहीं सकता है.
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की सेना रफाह जरूर जाएगी. हमारे पास एक रेड लाइन है. वो रेड लाइन ये है कि अब हम फिर सात अक्टूबर जैसी घटना नहीं होने देंगे. मिस्र और गाजा के सीमा पर मौजूद रफाह में 13 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनियों ने शरण ले रखी है. ऐसे में यदि इजरायल यहां जमीनी हमला करता है तो भारी नुकसान होना तय है. बड़ी संख्या में लोग मारे जाएंगे.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि वे रफाह में हमले का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा था कि वो ये स्वीकार नहीं कर सकते कि 30 हज़ार और फिलिस्तीनी मारे जाएं. गाजा में जंग के लिए नेतन्याहू का नजरिया इजरायल की मदद करने से ज्यादा इजरायल को नुकसान पहुंचा रहा है. सोमवार को भी इजरायली पीएम को लेकर राष्ट्रपति बाइडेन ने बयान देते हुए कहा कि फिलहाल उनके साथ बैठक की कोई योजना नहीं है.
रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो गया है. गाज़ा में फिलिस्तीनियों ने युद्ध के साये में अपना पहला रोज़ा रखा. संकट की इस घड़ी में गाजा की एक बड़ी आबादी भूखमरी की कगार पर है. ऐसे में एक संगठन ने लोगों के लिए इफ्तारी का इंतज़ाम किया था. अपना सबकुछ खो चुके फिलिस्तीनियों ने खुले आसमान के नीचे नमाज़ अदा की. इजरायल और हमास के बीच जंग की वजह से पैदा हुए संकट की घड़ी में लोगों का जीना मुहाल हो गया है.
तमाम मजबूर फिलिस्तीनी पिछले साल को याद कर रहे हैं और अपना दर्द एक-दूसरे से साझा कर रहे हैं. लिहाज़ा हालात को देखते हुए इफ्तार संगठन माहेर सैलआउट ने ज़िम्मा उठाया और लोगों को इफ्तारी का इतंज़ाम किया. माहेर का कहना है कि हम युद्ध के साये में जी रहे हैं. लोगों के पास कुछ नहीं है. इसलिए उन्होंने पूरे महीने इफ्तार का इंतज़ाम करने का फैसला किया है. इसके साथ गाजा में जारी इस जंग को रोकने की मांग की गई है.
इजरायल और हमास के बीच संघर्ष को पांच महीने से ज्यादा हो गए हैं. हालात बेहद नाज़ुक हैं. इज़रायली हमलों में गाजा का 80 फीसदी हिस्सा तबाह हो चुका है. 31 हज़ार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. 23 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं. लिहाज़ा इनके पास ना तो रहने को घर है और ना ही खाने-पीने के लिए भोजन. इलाज के लिए दवा तक मुहैया नहीं है. बच्चे भूखे-प्यासे मर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय बेबस और लाचार नजर आ रहा है.
