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नाटो के लिए बड़ा खतरा बना चीन, घेरने को प्लान तैयार, प्रशांत महासागर में युद्धपोतों का जमावड़ा

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वॉशिंगटन:

चीन से अब तक नजरें चुरा रहा नाटो आखिरकार प्रशांत महासागर में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने को मजबूर हो गया है। नाटो अभी तक सिर्फ रूस को ही सबसे बड़ा खतरा मानता था, लेकिन इस साल जुलाई में वॉशिंगटन में हुए सम्मेलन में चीन को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया। इसके बाद से ही चीन नाटो के निशाने पर आ गया है। नाटो में शामिल सदस्य भी चीन के खिलाफ सैन्य तैनाती कर रहे हैं। इनमें अब इटली भी शामिल हो गया है। इटली ने पहली बार चीन से सटे प्रशांत महासागर इलाके में अपना एयरक्राफ्ट कैरियर कैवूर को तैनात किया है।

चीन के करीब पहुंचा इतालवी कैरियर
कैवूर और एक अन्य इतालवी फ्रिगेट ने हाल में ही गुआम द्वीप के पास अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ अभ्यास किया है। कैवूर वाहक स्ट्राइक समूह के कमांडर रियर एडमिरल जियानकार्लो सियापिना ने कहा, “यह सबसे बढ़कर, कहीं भी शक्ति इस्तेमाल करने की हमारी क्षमता का प्रदर्शन है।” कुछ सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यूरोपीय नौसेना प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संघर्ष में अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाएगी। लेकिन उनकी लगातार बढ़ती उपस्थिति चीन के साथ संबंधों को तनावपूर्ण बना रही है।

क्या अमेरिका के साथ देंगे बाकी नाटो देश
चीन लगातार ताइवान के पास लड़ाकू और बमवर्षक विमानों को उड़ा रहा है। आशंका है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने ताइवान की रक्षा का वादा किया है। ऐसे में ताइवान पर हमले की सूरत में अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो सकता है। ऐसे समय में यूरोपीय नौसेनाएं अमेरिकी सैन्य शक्ति को बढ़ा सकती हैं, जैसे कि अमेरिकी विमानों के लिए अतिरिक्त प्लेटफॉर्म प्रदान करना, पनडुब्बी का शिकार करने वाली क्षमताओं को बढ़ाना, सैन्य आपूर्ति को बनाए रखना। नाटो सदस्यों के बीच आपसी रक्षा संधि है जो केवल यूरोप और उत्तरी अमेरिका में हमलों पर लागू होती है, इसलिए उन्हें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक-दूसरे की रक्षा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं किया जा सकता है।

ब्रिटेन-फ्रांस भी भेज रहे एयरक्राफ्ट कैरियर
ब्रिटिश विमानवाहक पोत एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स और उसका स्ट्राइक ग्रुप अगले साल प्रशांत क्षेत्र में पहुंचने वाला है। फ्रांस ने भी कहा है कि वह चार्ल्स डी गॉल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप प्रशांत महासागर क्षेत्र में भेजेगा। स्ट्राइक ग्रुप एक विमानवाहक पोत के इर्द-गिर्द बना एक छोटा-सा सैन्य दल होता है जिसमें आमतौर पर विध्वंसक, क्रूजर और अन्य जहाज, साथ ही लड़ाकू जेट और अन्य विमान शामिल होते हैं। जर्मनी और नीदरलैंड भी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अन्य सदस्यों में शामिल हैं जो इस क्षेत्र में युद्धपोत भेजने की योजना बना रहे हैं।

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