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यूक्रेन से कश्मीर की तुलना, बिलावल बोले- क्यों महज कागज का टुकड़ा बन जाता है UNSC का प्रस्ताव

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नई दिल्ली,

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की बेतुकी बयानबाजी जारी है. इस बार बिलावल भुट्टो ने यूक्रेन की तुलना कश्मीर से की है. यूक्रेन संकट में कश्मीर को जबरन लाते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा कि ये पहला संकट नहीं है जब यूनाइटेड नेशंस के प्रस्ताव का उल्ंलघन किया गया है.

कश्मीर पर अपना प्रोपगैंडा फैलाने में नाकाम रहने वाले बिलावल ने यूरोप और पश्चिमी देशों पर अपनी खीझ निकालते हुए कहा कि जिस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों का पश्चिम और यूरोपीय देशों के लिए इतना महत्व रहता है उन्हीं प्रस्तावों का कागज के टुकड़े से ज्यादा महत्व नहीं रह जाता है जब बात कश्मीर की आती है.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में एक चर्चा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन और पाक विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने यूक्रेन संकट पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में कूटनीति में शामिल होने के लिए दोनों पक्षों को अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना होगा.

यूक्रेन संकट का जिक्र करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा कि इस युद्ध का प्रभाव सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि अनाज की बढ़ी कीमतों और महंगे पेट्रोलियम पदार्थों के रूप में पाकिस्तान को भी प्रभावित कर रहा है. बिलावल भुट्टो ने कहा, “जहां तक यूएनएससी प्रस्तावों, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय संकट के समर्थन का संबंध है, हम दुनिया के समान विचार साझा करते हैं, हालांकि, हम संघर्ष को अपने समय में पहली बार नहीं देख रहे हैं जहां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन किया गया.”बिलावल ने कहा कि ये विडंबना है कि संयुक्त राष्ट्र के कानून यूक्रेन में लागू होते हैं लेकिन इराक में नहीं.

पत्रकारों के साथ चर्चा के दौरान बिलावल भुट्टो इसके बाद कश्मीर का मुद्दा छेड़ दिया. कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगैंडा को इंटरनेशनल फोरम पर जगह न मिलने पर बिलावल भुट्टो ने अपनी खीझ निकालते हुए कहा कि ये बहुत दुखद है कि कश्मीर का मसला आने पर यूरोप और पश्चिमी के देशों के लिए ये प्रस्ताव महज कागज का टुकड़ा बन जाता है. उन्होंने कहा, “हमें यह हताशाजनक लगता है कि UNSC के प्रस्ताव यूरोप और पश्चिम के लिए बहुत मायने रखते हैं, लेकिन जम्मू और कश्मीर की बात आने पर उनके लिए ये प्रस्ताव उस कागज से ज्यादा कुछ नहीं होते जिस पर वे लिखे गए हैं.”

बिलावल भुट्टो ने कहा कि दुनिया को खतरे में डालने वाले मौजूदा विवादों को ठीक से सुलझा लिया गया होता अगर संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय संस्थान मौजूदा युग की जरूरतों के अनुसार काम करना शुरू कर देते. बता दें कि बिलावल भुट्टो पहले भी कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं. पिछले साल दिसंबर में बिलावल भुट्टो ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था. सुरक्षा परिषद में ‘अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा’ के मुद्दे पर बोलते हुए बिलावल भुट्टो ने बड़ी चालाकी से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे को दरकिनार कर दिया और कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव को उठाया. तब उन्होंने कहा था कि सुरक्षा परिषद को इस प्रस्ताव को लागू करना चाहिए.

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