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एलन मस्‍क या हार्वर्ड का अर्थशास्त्री… ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के पीछे किसका दिमाग? पूरी दुनिया हिल गई

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नई दिल्‍ली:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी उनके दूसरे कार्यकाल में लगातार सुर्खियों में रही है। इसने पूरी दुनिया को हिला डाला। अगर आपको लगता है कि इसके पीछे दुनिया के सबसे अमीर शख्‍स एलन मस्‍क का दिमाग है तो यह भूल है। सच तो यह है कि ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी हार्वर्ड के अर्थशास्त्री स्टीफन मिरन के दिमाग की उपज है। वह ट्रंप के आर्थिक सलाहकार हैं। मिरन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी हैं। वह वैश्विक व्यापार प्रणाली को बदलने के लिए टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के समर्थक हैं।

स्‍टीफन मिरन को 22 दिसंबर, 2024 को डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद शक्तिशाली काउंसिल ऑफ इकोनॉमिक एडवाइजर्स (सीईए) का प्रमुख चुना था। इसके बाद वह राष्ट्रपति की टैरिफ-हैवी ट्रेड पॉलिसी के सबसे मुखर समर्थकों में से एक बन गए। उनकी नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। मिरन का मानना है कि टैरिफ अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों को प्राथमिकता देने के लिए जरूरी है।

बोस्‍टन और हार्वर्ड से पढ़े हैं म‍िरन
स्टीफन मिरन ने बोस्टन यूनिवर्सिटी से 2005 में अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र और गणित में डिग्री हासिल की। फिर उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की। उन्होंने 2010 में ग्रेजुएशन किया। हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान उन्हें मार्टिन फेल्डस्टीन का मार्गदर्शन मिला। फेल्डस्टीन प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे। उन्होंने 1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के अधीन सीईए के अध्यक्ष के रूप में काम किया था। ट्रंप प्रशासन में शामिल होने से पहले मिरन हडसन बे कैपिटल में एक सीनियर रणनीतिकार थे। यह एक वैश्विक निवेश फर्म है।

नवंबर 2024 में हडसन बे कैपिटल में काम करते हुए मिरन ने 41 पेज की एक गाइड लिखी। इसका नाम ‘यूजर गाइड टू रीस्ट्रक्चरिंग द ग्लोबल ट्रेडिंग सिस्टम’ था। इस गाइड में वैश्विक व्यापार और वित्तीय प्रणालियों को अमेरिका के फायदे के लिए समायोजित करने के लिए एक ढांचा बताया गया था। इसमें कहा गया था कि टैरिफ का इस्तेमाल दूसरे देशों से अमेरिकी निर्यात के लिए बाजार पहुंच हासिल करने के लिए किया जा सकता है। अब यह रणनीति ट्रंप के हालिया कदमों के केंद्र में दिख रही है।

टैरिफ को अमेर‍िका के ल‍िए मानते हैं सही
मिरन टैरिफ को अमेरिका की व्यापार स्थिति को मजबूत करने के लिए सही मानते हैं। उन्होंने हडसन इंस्टीट्यूट में कहा था कि टैरिफ पर कुछ ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ज्यादातर अर्थशास्त्री और कुछ निवेशक टैरिफ को ज्यादा से ज्यादा नुकसानदायक मानते हैं। वे गलत हैं।

हडसन इंस्टीट्यूट में मिरन ने कहा था कि राष्ट्रपति के रेसिप्रोकल टैरिफ ‘अनुचित व्यापार प्रथाओं’ को निशाना बनाते हैं। जैसे कि करेंसी में हेरफेर और डंपिंग। उनका मकसद सिर्फ राजस्व पैदा करना नहीं है। इस राजस्व का इस्तेमाल टैक्स कम करने और अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि टैरिफ का इस्तेमाल अमेरिका को व्यापार में मजबूत बनाने के लिए किया जा सकता है। मिरन जैसे सलाहकारों का मानना है कि टैरिफ अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने और अमेरिकी व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कई अर्थशास्त्री और निवेशक इस रणनीति को नुकसानदायक मानते हैं। उनका मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार में बाधा आ सकती है और अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।

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