नई दिल्ली
अमेरिका का कर्ज अप्रैल में नए रेकॉर्ड पर पहुंच गया। ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश की फेडरल गवर्नमेंट का कर्ज 34.6 अरब डॉलर पहुंच चुका है। पिछले साल सितंबर से इसमें 1.6 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। पिछले चार साल में देश का कर्ज 47 फीसदी यानी करीब 11 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है। दूसरे शब्दों में कहें तो देश के हर टैक्सपेयर पर करीब 267,000 डॉलर यानी करीब 2,21,75,778 रुपये का कर्ज है। अगर यही रफ्तार रही तो अमेरिका का कर्ज 2025 तक 40 ट्रिलियन पहुंचने का अनुमान है। 2017 में यह 20 ट्रिलियन डॉलर था। यानी आठ साल में ही देश का कर्ज दोगुना पहुंचने की राह पर है। अगर फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है तो इस कर्ज पर अमेरिका को सालाना 1.6 ट्रिलियन डॉलर ब्याज देना होगा। माना जा रहा है कि इस साल पहली बार अमेरिका का इंटरेस्ट पेमेंट उसके डिफेंस बजट और मेडिकेयर खर्च से ऊपर पहुंच जाएगा।
अमेरिका के कई अर्थशास्त्रियों और इंडस्ट्री के दिग्गजों ने देश के बढ़ते कर्ज पर चिंता जताई है। इस साल देश के कर्ज में 500 अरब डॉलर से अधिक तेजी आई है। दुनिया के सबसे बड़े बैंक जेपी मोर्गन के सीईओ ने सरकार को जल्दी से जल्दी अपनी बैलेंस शीट दुरुस्त करने को कहा है। JPMorgan Chase के CEO जैमी डाइमन ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका की इकॉनमी में हाल के वर्षों में जो ग्रोथ आई है, उसकी वजह कर्ज रहा है। देश का डेट-टु-जीडीपी 124% पहुंच गया है। अगर बढ़ते डेट-टु-जीडीपी रेश्यो को रोका नहीं गया तो यह देश के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। पिछले साल यानी 2023 में देश का कुल डेफिसिट स्पेंडिंग 1.7 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। इस साल भी सरकार अपनी कमाई से 855 अरब डॉलर ज्यादा खर्च कर चुकी है।
कैसे बढ़ता गया कर्ज
1930 में अमेरिका पर 16 अरब डॉलर का कर्ज था जो 1940 में 43 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके बाद अगले दस साल में इसमें बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली और 1950 में यह 257 अरब डॉलर हो गया। 1950 से 1960 के बीच इसमें 29 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। साल 1960 में यह 286 अरब डॉलर पहुंच गया। साल 1970 में अमेरिका का कर्ज 371 अरब डॉलर था। लेकिन अगले दस साल में इसमें ढाई गुना से ज्यादा तेजी आई। 1980 में अमेरिका का कर्ज 908 अरब डॉलर पहुंच गया। 1990 में अमेरिका का कर्ज 3.2 ट्रिलियन डॉलर और 2000 में 5.6 ट्रिलियन डॉलर छू गया। 2010 में देश का कर्ज बढ़कर 13.5 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 27.7 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
