नई दिल्ली
पाकिस्तान की खस्ता हालत से परेशान वहां के व्यापारियों का गुस्सा देश के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान पर फूट पड़ा है. व्यापारियों ने मिलकर स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद की भरपूर आलोचना की. व्यापारी हर तरह से व्यापार पर प्रतिबंध लगाने और सामान से लदे जहाजों को बंदरगाहों पर ही रोके जाने को लेकर बेहद गुस्से में हैं.
कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) के सदस्यों ने पिछले हफ्ते टाउन हॉल मीटिंग में खाद्यान्न, दवा और औद्योगिक कच्चे माल से लदे 5,700 कंटेनरों को लेकर गर्वनर पर निशाना साधा गया. दिलचस्प बात ये है कि गवर्नर उनके सामने ही बैठे थे लेकिन व्यापारी वर्ग ने उनकी कड़ी आलोचना करते हुए उन पर जरा भी दया नहीं दिखाई.व्यापारियों के माल से लदे 5,700 कंटेनर महीनों से विभिन्न बंदरगाहों पर पड़े हैं और व्यापारियों को इनके खराब होने की चिंता सता रही है. उन्हें बंदरगाहों पर पड़े सामान की लेट फीस के रूप में मोटी रकम भी देनी पड़ रही है.
आयात प्रतिबंध से सुस्त पड़े पाकिस्तान के उद्योग
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने डॉलर की किल्लत को देखते हुए देश के सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वो आयात के लिए साख पत्र (Letter of Credit) न दें. डॉलर नहीं होने से पाकिस्तान ने कई बहुत जरूरी सामानों के आयात पर भी रोक लगा दी है. K-इलेक्ट्रिक बिलिंग के आधार पर, KCCI ने बताया कि कराची स्थित कारखानों द्वारा बिजली की खपत हाल के महीनों में 30-35 प्रतिशत कम हो गई है, जो औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट को दिखाता है.
धंधा चौपट होने के कारण एक नाराज व्यापारी ने तो गवर्नर को शर्मिंदा कर दिया. उसने मखमली बक्से में अपने कारखाने की चाबी अहमद को सौंपी जिसके बाद गवर्नर झेंप गए. वह अपनी सीट पर बैठ गए और व्यापारी से बिना आंख मिलाए चाबी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
‘अच्छे दिनों का वादा महज एक लॉलीपॉप’
इसी तरह, साबुन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इत्र के एक आयातक ने गवर्नर से कहा कि अच्छे दिनों का उनका वादा महज एक लॉलीपॉप था. आयातक ने कहा, ‘यह डॉलर की कमी का मुद्दा नहीं है. मसला आपकी मंशा का है.’उसने कहा कि उसके विदेशी आपूर्तिकर्ता उसे एक साल के लिए कर्ज दिया है लेकिन फिर भी बैंक उसके इंपोर्ट डॉक्यूमेंट को क्लियर नहीं कर रहे. उसने रूखेपन से कहा, ‘मुझे तो आपके डॉलर की भी बिल्कुल जरूरत नहीं है फिर आप मेरे इंपोर्ट डॉक्यूमेंट को क्लियर क्यों नहीं करते.’
एसबीपी एक ‘नीलामी घर’
एक अन्य व्यवसायी ने गवर्नर की आंखों में आंखे डालकर गुस्से में कहा कि उसके एक डॉलर के भुगतान के क्लियरेंस के लिए एसबीपी अधिकारियों ने उससे 2,000 डॉलर की रिश्वत ली. उसने आरोप लगाया कि एसबीपी एक ‘नीलामी घर’ बन गया है, जहां आयातक अपने विदेशी भुगतानों के लिए अधिकारियों की जेबें भरते हैं. यह सुनकर गवर्नर नाराज हो गए, लेकिन व्यवसायी यही नहीं रुका. उसने कहा कि इस बात का उसके पास पुख्ता सबूत है.
व्यवसायी ने केसीसीआई की लीडरशिप से एसबीपी की तरफ से रोके गए आयात और लंबित भुगतानों का विवरण मांगने को कहा. उसने एसबीपी की आधिकारिक स्थिति को दोहराते हुए कहा कि वो खाद्य उत्पादों, ऊर्जा से संबंधित आयात और औद्योगिक कच्चे माल को अन्य सभी आयातों की तुलना में प्राथमिकता दे.अहमद ने व्यवसायियों की बात सुनने के बाद कहा कि आयात भुगतान के लगभग 11,000 मामले लंबित हैं. केंद्रीय बैंक जल्द से जल्द इसे हल करने की कोशिश कर रहा है.
इससे पहले, केसीसीआई के अध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ तारिक ने सुझाव दिया कि एसबीपी को इस बात का फैसला नहीं करनी चाहिए कि आयात की प्राथमिक सूची में क्या-क्या चीजें शामिल होंगी. उन्होंने कहा कि इससे पक्षपात और हेरफेर हो रहा है. इसके बजाए पिछले वर्ष के कारोबार के आधार पर एलसी कोटा आवंटित किया जाना चाहिए.
