नई दिल्ली,
अमेरिकी राष्ट्रपित जो बाइडेन की तरफ से कुछ दिन पहले Inflation Reduction Act (IRA) को पारित किया गया था. इस एक्ट के जरिए अमेरिका आने वाले सालों में ग्रीन हाउस गैसों को काफी कम कर देगा. ऐसा करने के लिए उसकी तरफ से बड़े स्तर पर सब्सिडी दी जाएगी, टैक्स में छूट दी जाएगी. लेकिन अमेरिका का ये फैसला कई देशों को रास नहीं आ रहा है. जिस स्तर पर सब्सिडी दी जा रही हैं. उससे इंटरनेशनल मोनेट्री फंड भी चिंतित हो गया है.
IMF की हेड Kristalina Georgieva ने कहा है कि मेरी सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि ये फैसला सैद्धांतिक रूप से सही है क्योंकि पब्लिक मनी से प्राइवेट निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे ग्रीन इकोनॉमी बनेगी. लेकिन जो विकासशील देश हैं उनके लिए ये शायद ये थोड़ा संकट पैदा कर दे. IMF हेड ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के इस फैसले की वजह से टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर तो होगा, लेकिन वो गरीब देशों से अमीर देशों की तरफ होगा. तर्क दिया गया है कि औद्योगिक दुनिया को स्वच्छ बनाने का प्रयास तो ठीक है, लेकिन उभरते बाजारों को साथ लेकर चलना जरूरी है.
अब इन तमाम चिंताओं के बीच अमेरिका के जलवायु दूत जॉन कैरी ने जोर देकर कहा है कि दूसरे देशों को शिकायत नहीं करनी चाहिए. इसके बजाय उन्हें अमेरिका के पदचिन्हों पर चलना चाहिए. हर बार ये कहना कि ऐसे फैसले पक्षपात वाले हैं, ठीक नहीं है. अगर ग्रीन इकोनॉमी की ओर कदम बढ़ाने हैं तो सभी देशों को इस दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा. जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका Inflation Reduction Act (IRA) के जरिए पर्यावरण और ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं पर 369 बिलियन डॉलर खर्च करने जा रही है. इस एक फैसले के बाद अमेरिका दुनिया में सबसे कम ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लागत वाला देश बन जाएगा.
