तेहरान
ईरान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट को विकसित करने लिए भारत ने खजाना खोल दिया है। भारत ने बंदरगाह के विकास के लिए लगभग 24 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,02,95,48,535 रुपये) की कीमत के पोर्ट उपकरण पहले ही आपूर्ति कर दिए हैं। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ये जानकारी दी है। भारत और ईरान ने मई 2015 में चाबहार परियोजना पर विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
मई 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय परिवहन और पारगमन गलियारा स्थापित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसी साल भारत ने चाबहार बंदरगाह के संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। ईरान के साथ दीर्घकालिक अनुबंध पर हस्ताक्षर करना मध्य एशिया के लिए भारत की रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि का हिस्सा है। चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान को साइडलाइन करते हुए मध्य एशिया तक भारत के लिए पहुंच प्रदान करता है। ऐसे में इस परियोजना से पाकिस्तान के लिए तगड़ा झटका लगा है।
भारत के पास संचालन का अधिकार
भारत इस समय ईरान की सरकार के सहयोग से चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के पहले चरण के विकास में हिस्सा ले रहा है। जयशंकर ने भारतीय संसद को जानकारी देते हुए बताया कि 24 दिसम्बर 2018 को एक भारतीय कंपनी आईजीपीएल ने अपनी पूर्व स्वामित्व वाली इंडियो पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से बंदरगाह का संचालन अपने हाथ में ले लिया था। 13 मई 2024 को IPGL ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को सुसज्जित करने और संचालित करने के लिए दस साल का अनुबंध किया।
भारत ने बढ़ाई सहायता
जयशंकर ने बताया कि उपकरणों की आपूर्ति के लिए अनुदान की सहायता को बढ़ाकर 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मूल्य की ऋण सहायता दी जाएगी। यह सहायता रुपये में दी जाएगी। साल 2018 से बंदरगाह ने 450 से अधिक जहाजों और 87 लाख टन से अधिक थोक और सामान्य कार्गो को संभाला है।
