हेग:
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर इजरायल के कब्जे के मामले में सोमवार से सुनवाई शुरू कर दी है। इजरायल के खिलाफ गाजा पट्टी में नरसंहार करने के आरोपों पर भी अतंरराष्ट्रीय अदालत ने करीब एक महीने पहले सुनवाई की थी। अब एक अलग केस में फिलीस्तीनी क्षेत्रों पर अवैध तरीके से कब्जे करने के मामले में सुनवाई हो रही है। अपनी तरह के इस पहले मामले में कम से कम 52 देश वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम में विवादास्पद इजरायली नीतियों पर दलीलें पेश करेंगे। 1945 में अदालत की स्थापना के बाद से आईसीजे में किसी एक केस में भाग लेने वाले पक्षों की यह सबसे बड़ी संख्या है।
संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत, आईसीजे 1967 से यानी 58 साल पहले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर हुए इजरायल के कब्जे के मामले में सुनवाई कर रही है। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी येरुशलम पर इजरायल के कब्जे के कानूनी परिणामों पर 52 देशों और तीन संगठनों की सुनवाई करेगा। इजरायल पर 1967 में वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप है। 1948 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित फिलिस्तीन के विभाजन के तहत फिलिस्तीन के हिस्से को उससे छीना गया है। 1967 से 2005 के बीच इजरायल ने ये कब्जे किए हैं और 2007 से गाजा के तटीय क्षेत्र पर भूमि, समुद्र और हवाई नाकाबंदी लगा दी है। ऐसे में गाजा तक भोजन, पानी, दवाएं, ईंधन, निर्माण सामग्री और दूसरी चीजों की पहुंच इजरायल पर निर्भर है।
सुनवाई पूरी होने में लग सकते हैं कई महीने
आईसीजे ने बीते हफ्ते एक बयान में कहा है कि मामले में एक सप्ताह तक बहस चलेगी। इसके दौरान सभी देशों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों यह बताएंगे कि कि वे इजराइल का समर्थन या विरोध क्यों करते हैं। इजरायल ने कोर्ट की मौखिक बहस में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके बजाय इजरायल ने एक लिखित तर्क प्रस्तुत करने का विकल्प चुना है। इस केस की सुनवाई खत्म होने में काफी वक्त लग सकता है। अगले कुछ महीनों में अदालत का फैसला आने की उम्मीद है।
इस्राएल के खिलाफ ये मुकदमा 30 दिसंबर, 2022 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के अनुरोध से शुरू हुआ था। तब अधिकांश सदस्यों ने फिलिस्तीन पर जारी इजरायली कब्जे के कानूनी परिणामों पर अदालत की राय लेने के लिए मतदान किया था। अरब देशों, रूस और चीन ने इस कदम के पक्ष में मतदान किया था जबकि इजराइल, अमेरिका, जर्मनी और 24 अन्य देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया था।
2004 में इजरायल के खिलाफ आया था फैसला
इजरायल ने 1967 में छह दिवसीय युद्ध के दौरान पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया, जो पहले जॉर्डन के नियंत्रण में थे। अधिकांश देश और संयुक्त राष्ट्र अभी भी कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में देखते है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इजरायल के कब्जे को अवैध मानते हैं।
आईसीजे देशों के बीच मामलों की सुनवाई करती है और फैसला सुनाता है। यह दूसरी बार है जब वह इजरायल के अवैध कब्जे पर विचार करेगी। 2004 में आईसीजे ने अपने फैसला में कहा था कि वेस्ट बैंक में इजराइल की ओर से बनाए गई दीवार को अवैध कहते हुए इसे फिलीस्तीन को बांटने वाला कहा था। आईसीजे ने इसे हटाने के लिए कहा था लेकिन इजरायल ने फैसले को खारिज करते हुए इस दीवार को बढ़ा दिया है।
