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ईरान पर हमले की 20 साल से प्लानिंग कर रहा है इजरायल, घातक हथियार बनाने में फूंके अरबों डॉलर

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तेल अवीव:

इजरायल के लिए उसका सबसे बड़ा दुश्मन ईरान है। ईरान पर संभावित हमले की तैयारी के लिए पिछले दो दशकों से इजरायल तैयारी कर रहा है। इजरायल ने रक्षा तंत्र में अरबों का निवेश किया है। उसने कई एडवांस्ड गोला बारूद बनाए हैं। इजरायल के पास हो सकता है कई और घातक हथियार हों। क्योंकि उसके कुछ हथियारों के बारे में हमें तभी पता चला जब उसे किसी दूसरी वायुसेना को बेचा गया। हाल के ऑपरेशनों ने दूरी से हमला करने की इजरायल की क्षमता को प्रदर्शित किया है। इजरायल ने पिछले महीने यमन पर एक और हमला किया। 1800 किमी दूर के बेस से एफ-15 जेट भेज कर हमला किया गया।

यह हमला इजरायल की ओर से चीजों को बदलने की क्षमता दिखाता है। जो फाइटर जेट हवाई युद्ध के लिए बनाए गए थे, उन्हें इजरायल ने स्ट्राइक मिशनों के लिए बदल दिया। इन जेट्स को इजरायल ने उन्नत हथियारों से लैस किया। हालांकि लगभग समान दूरी होने से भी ईरान पर हमला काफी मुश्किल है। ईरान की न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल फैसिलिटी जमीन की काफी गहराी में हैं। ऐसे में उन्हें टार्गेट करना इजरायल के लिए मुश्किल है। इसके अलावा ईरान ने खुद का एयर डिफेंस सिस्टम बना रखा है जो कथित तौर पर रूस के एस-300 जैसा काम करता है।

अरबों डॉलर का किया खर्च
इजरायल ने पिछले 2 दशकों में अरबों डॉलर का निवेश कर खतरनाक हथियार बनाए हैं। कुछ को तो उसने अमेरिका को भी बेचने से मना कर दिया है। इजरायल ने अपने लड़ाकू विमानों की सीमा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमें खास तरह के फ्यूल टैंक का निर्माण शामिल है, जो विमान के एयरोडायनेमिक्स में बदलाव किए बिना उड़ान की दूरी बढ़ाते हैं। कई रिपोर्ट्स का दावा है कि एफ-35 जेट से अलग करने लायक ईंधन टैंक बनाए गए हैं। अपनी स्टील्थ क्षमता के साथ यह ईरान तक जा सकता है।

इजरायल ने बनाई घातक मिसाइलें
इजरायल ने 2000 के दशक में लड़ाकू जेट से लॉन्च की जाने वाली लंबी दूरी की हमलावर मिसाइलें बनाई हैं। इनकी रेंज की सटीक जानकारी नहीं, लेकिन सैकड़ों किमी के टार्गेट को यह मार सकती हैं। यानी ईरानी डिफेंस के करीब जाए बिना इजरायल हमला कर सकता है। इनके दो उदाहरणों की बात करें तो रैंपेज मिसाइल और रॉक्स मिसाइल हैं।

रैंपेज मिसाइल: इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और एल्बिट सिस्टम्स ने इसे मिलकर विकसित किया है। इस मिसाइल में कई नेविगेशन सिस्टम हैं और इसे हवाई तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। सैकड़ों किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल बैटरी और कमांड सेंटर के खिलाफ प्रभावी है। यह 4.7 मीटर लंबी और 30.6 सेंमी व्यास वाली है। इसका वजन 570 किग्रा है जो 150 किग्रा विस्फोटक ले जा सकती है।

रॉक्स मिसाइल: राफेल ने इसे 2019 में दुनिया के सामने रखा। यह सुपरसोनिक हथियार सैटेलाइट से नेविगेट किया जा सकता है। मजबूत जमीनी संरचनाों पर हमला करने में यह महत्वपूर्ण है। इसे एफ-16 और एफ-35 फाइटर जेट से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी अनुमानित रेंज 300 किमी है।

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