नई दिल्ली,
अमेरिका सहित तमाम देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की अपील को दरकिनार करके इजरायल और हमास भीषण जंग में है. एक-दूसरे पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं. रविवार को इजरायल पर हमास ने पांच महीने बाद मिसाइल अटैक किया तो आईडीएफ ने इसका बदला कुछ घंटों के अंदर ही ले लिया. इजरायली सेना ने रफाह में इस तरह से जबरदस्त हवाई हमला किया कि पूरा गाजा दहल उठा. इस हमले में करीब 45 फिलिस्तीनी मारे गए हैं. सैकड़ों लोग घायल हैं.
गाजा के राफा शहर में हुए हमले में फिलिस्तीनियों के मारे जाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये एक ‘दुखद गलती’ थी. हम ऐसा नहीं करना चाहते थे. दरअसल, इजरायल हमेशा ये कहता है कि वो गाजा में आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन उनके बीच छिपे हमास के आतंकियों के मारने के लिए उसे हवाई हमला करना पड़ता है. इस जंग में बेकसूर लोगों के मारे जाने की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है.
इजरायली सेना ने रफाह में हमले से पहले लोगों को अलर्ट किया था, लेकिन हमास ने रविवार को एक बार फिर तेल अवीव पर रॉकेट से हमला कर दिया. इसके पलटवार में इजरायल ने रफाह में जबरदस्त एयर स्ट्राइक कर दी. हमास की इस गलती का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा. वहीं फिलिस्तीनी लोगों ने इजरायली सेना और अमेरिकी राष्ट्रपति पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि वे सीजफायर का झूठा दिलासा दे रहे हैं.
इजरायली सेना ने हमास के ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया, लेकिन इसकी चपेट में रिफ्यूजी कैंप आ गए. इसकी वजह से वहां पर आग लग गई और कई लोग जिंदा जल गए. इस हमले में 45 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से ज्यादा घायल हो गए. हमले से तबाह गाजा के रफाह स्थित इस इलाके में करीब 8 से 10 लाख लोगों का परिवार रहता है. ये सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता था. लेकिन हमले के बाद अब लोगों का डर बढ़ गया है.
फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मरने वालों में ज़्यादातर बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. इज़रायली सेना ने ये हमला रविवार को देर रात में किया. इसके बाद हर तरफ कोहराम मचा हुआ है. रफाह में हुए इस हवाई हमले की पुष्टि आईडीएफ ने भी की है. सेना की दलील है कि ये हमला हमास के ठिकानों के सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया था. आईडीएफ ने ये भी माना कि उनकी वायु सेना ने रफाह में हमास के एक परिसर पर हमला किया था.
इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विरोध लगातार जारी है. बीते शनिवार को भी हजारों की तादाद में लोग बंधकों की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे, लेकिन इस बीच उनकी पुलिस से जमकर झड़प हो गई. पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया. दरअसल इसी हफ्ते तीन इज़रायली बंधकों के शव गाज़ा में बरामद किया गया था, जिसके बाद से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया.
वहीं दूसरी तरफ लेबनान की सीमा से सटे इजरायल के माउंट मेरॉन में पुलिस ने रूढ़िवादी यहूदियों के खिलाफ भी कार्रवाई की. इस दौरान दोनों के बीच जमकर हिंसक झड़प भी हुई जिसका वीडियो पुलिस ने जारी किया था. आरोप लगाया था कि रूढ़िवादी यहूदी उन पर पत्थर फेंक रहे थे. पुलिस ने ये कार्रवाई पवित्र त्योहार लैग बामाओमर त्योहार से ठीक पहले की, जहां हज़ारों लोग इक्ट्ठा होने वाले थे. माउंट मेरॉन लेबनान की सीमा से 10 किमी दूरी पर है.
बताते चलें कि नीदरलैंड के द हेग में मौजूद अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से इजरायल को तगड़ा झटका लगा है. आईसीजे यानी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इजरायल को गाजा के रफाह में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को रोकने का आदेश दिया हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने दक्षिण अफ्रीका की याचिका पर ये फ़ैसला सुनाया था. इसके बावजूद इजरायली सेना गाजा में हमले जारी रखे हुए है. उत्तर से दक्षिण तक गाजा में आईडीएफ लगातार हवाई हमले कर रही है.
