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चीन के खिलाफ जापान और भारत देंगे अमेरिका का साथ, जहाजों की करेंगे मरम्मत, दक्षिण कोरिया को मिली पहली डील

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वॉशिंगटन:

अमेरिका एशिया में अपने सहयोगियों के साथ संबंधों को गहरा करने में लगा है। इस कारण उसने भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ महत्वपूर्ण डील की है। तीनों ही देशों में अमेरिका के जहाजों की मरम्मत होगी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अमेरिका का जहाज निर्माण उद्योग ढह रहा है। इस बीच दक्षिण कोरिया की एक महत्वपूर्ण कंपनी हानवा ओशन (Hanwha Ocean) ने एक कॉम्ट्रैक्ट हासिल किया है। अमेरिकी सैन्य जहाजों के रखरखाव, मरम्मत के लिए यह देश का पहला कॉन्ट्रैक्ट है। हनवा ओशन ने घोषणा की कि उसे 40000 टन सूखे कार्गो और गोला-बारूद जहाज को ओवरहाल करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है।

इस सौदे के तहत अमेरिकी नौसेना के जहाज को हनवा ओशन के स्वामित्व वाले जियोजे शिपयार्ड में डॉक करने के लिए कहा गया है। इसके अतिरिक्त, शिपयार्ड की फ्लोटिंग जहाज निर्माण सुविधाओं के इस्तेमाल करके तटवर्ती ओवरहाल कार्य किया जाएगा। ओवरहाल से मतलब किसी चीज की पूरी तरह से जांच, मरम्मत या नवीनीकरण होता है। यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी की ओर से 22 जुलाई को यूएस नेवल सप्लाई सिस्टम्स कमांड के साथ मास्टर शिप रिपेयर एग्रीमेंट (MSRA) के बाद का परिणाम है।

चीन का मुकाबला करने में लगा अमेरिका
बिजनेस कोरिया की रिपोर्ट के मुताबिक हनवा ओशन के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘अमेरिकी नौसेना के रखरखाव बाजार में घुसना एक नई छलांग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।’ हनवा ओशन ने हाल ही में अमेरिका के फिलाडेल्फिया शिपयार्ड का भी अधिग्रहण किया है। अमेरिकी नौसेना के सचिव कार्लोस डेल टोरो ने हनवा ग्रुप की ओर से अधिग्रहण की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘हनवा का फिली शिपयार्ड का फिलाडेल्फिया शिपयार्ड का अधिग्रहण हमारे नए मैरीटाइम स्टेटक्राफ्ट में एक गेम चेंजिंग मील का पत्थर है।’ चीन की बढ़ती नौसेना के जवाब में अमेरिका एशिया में अपनी क्षमता बढ़ाने में लगा है।

भारत के साथ भी किया समझौता
चीन के तेजी से बढ़ते जहाज निर्माण क्षमता की बराबरी करने के लिए अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर काम कर रहा है। पिछले 40 वर्षों में चीन ने एक बड़ा जहाज निर्माण उद्योग विकसित किया है। जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा अमेरिका अपने जहाजों के MRO के लिए भारत के साथ भी जुड़ रहा है। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के बीच सितंबर 2023 की बैठक के दौरान जारी एक संयुक्त बयान में अमेरिकी नौसेना के उपकरणों के रखरखाव में भारत की सहायता पर जोर दिया गया था। भारत की ओर से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, लार्सन एंड टुब्रो और कोचीन शिपयार्ड ने अमेरिकी नौसेना के साथ मास्टर शिप रिपेयर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पेंटागन के प्रवक्ता जनरल पैट राइडर ने पिछले साल एक बयान में कहा था कि भारतीय बंदरगाह संभावित संघर्षों में रणनीतिक उद्देश्य पूरा कर सकते हैं।

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