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कसाब को सबूत मिटाने के लिए दिया फांसी… तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण से खुली पोल तो बौखलाए द‍िल्‍ली में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त

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इस्लामाबाद:

तहव्वुर राणा के दिल्ली के इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मिर्ची लगी है। क्योंकि ये आतंकवादी भी पाकिस्तान की रहने वाला था, जिसने बाद में जाकर कनाडा की नागरिकता ले ली थी। पाकिस्तान के आतंक इंडस्ट्री से निकले तहव्वुर राणा को भारत, अमेरिका से घसीट लाया है, जो पाकिस्तान की बहुत बड़ी बेइज्जती है। लिहाजा अब पाकिस्तान की तरफ से अलग अलग सुर में आवाजें आ रही हैं। हालांकि पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय तहव्वुर राणा को कनाडाई नागरिक बताकर इस मामले से अपना पल्ला झाड़ चुका है। दिल्ली में काम कर चुके पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक अब्दुल बासित ने नया सिगूफा छोड़ते हुए कहा है कि भारत ने अजमक कसाब को बहुत जल्दी में फांसी दे दी, क्योंकि उसका मकसद सबूत मिटाना था।

अब्दुल बासित ने एक यूट्यूब चैनल पर बोलते हुए कहा कि ‘कई लोगों का मानना रहा है कि अजमल कसाब पाकिस्तानी नागरिक नहीं था, इसपर काफी विवाद है। हमारा, पाकिस्तान का एक ज्यूडिशियल कमीशन दिल्ली गया था, लेकिन वहां कसाब से मुलाकात नहीं करने की इजाजत नहीं दी गई, ताकि कसाब से क्रॉस एग्जामिनेशन किया जा सके। इससे पहले की दूसरी बार हमारा डेलिगेशन जाता, उसे फांसी दे दी गई।’

अब्दुल बासित फिर सबूत के लिए रोए
पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित एक बार फिर से वही रोना रो रहे हैं, जैसा पाकिस्तान सालों से रोता आया है। अब्दुल बासित ने कहा कि ‘मुंबई हमले का मुकदमा पाकिस्तान में भी चल रहा है। जबकि भारत उसके आरोपियों को सौंपने के लिए हमें कहता है। लेकिन हम कैसे सौंपे। एक तो मुकदमा पाकिस्तान में भी चल रहा है और दूसरा, भारत ने हमें क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं करने दिया, क्योंकि क्राइन सीन मुंबई में था।’ अब्दुल बासित ने कहा कि ‘आरोपियों को लेकर भारत ने पाकिस्तान को सबूत ही नहीं दिए, तो फिर पाकिस्तान कैसे कोई कार्रवाई करे।’ पाकिस्तान सालों से ऐसी ही बातें करता आ रहा है, लेकिन वो भूल जाता है कि वही आतंकवाद उसे भी खोखला कर रहा है। तालिबान जब पाकिस्तान से ऐसी ही भाषा में बात करता है तो उसे मिर्ची लगती है।

आपको बता दें कि तहव्वुर हुसैन राणा पाकिस्तानी मूल का एक कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में डॉक्टर और व्यवसायी के तौर पर काम कर रहा था। उसका नाम 2008 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़ा है। उसे अमेरिका की अदालत में डेविड कोलमैन हेडली के साथ मिलकर साजिश में शामिल माना गया है। वो करीब 10 सालों तक पाकिस्तानी सेना में बतौर डॉक्टर शामिल था। वो 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान डेविड कोलमैन हेडली का बेहद करीबी दोस्त और मददगार था। आरोपों के मुताबिक हेडली की मुंबई यात्रा और पहचान के लिए फर्जी बिजनेस डॉक्युमेंट्स देने से लेकर, रिहायश और फाइनेंसिंग तक, तहव्वुर राणा ने ही सबकुछ मैनेज किया था। अमेरिका में हुए ट्रायल के दौरान साफ हो गया कि राणा को ISI के संपर्क में रखा गया था। भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी जिसे इस साल मंजूरी मिल गई और फिर तहव्वुर राणा भारत ले आया गया।

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