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Wednesday, April 22, 2026
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म्यांमार में जुंटा सेना की बड़ी हार, पहली बार रोहिंग्‍या बहुल बांग्‍लादेश की सीमा पर विद्रोहियों का कब्जा

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नेपीडा

म्यांमार में लंबे समय से चल रहे गृह युद्ध में विद्रोही लड़ाकों को बड़ी कामयाबी मिली है और जुंटा शासन की सेना की जबरदस्त हार हुई है। अराकान आर्मी (एए) ने सेना के बेहद मजबूत ठिकाने, BGP5 बैरक पर कब्जा कर लिया है। यह बैरक रखाइन राज्य में बांग्लादेश की सीमा के पास है। ऐसे में देश के बॉर्डर का अहम इलाका जुंटा शासकों के हाथ से निकल गया है। अब अराकान आर्मी का बांग्लादेश से लगी म्यांमार की पूरी सीमा पर नियंत्रण हो गया है। यह 2021 के तख्तापलट के बाद सेना की बड़ी हार है। इससे म्यांमार में चल रहे गृह युद्ध में एक नया मोड़ आ गया है क्योंकि अराकान आर्मी अब पूरे रखाइन राज्य को कंट्रोल कर रही है, सिर्फ राजधानी सित्त्वे पर ही सेना का कब्जे बचा है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में 2021 में सेना के सत्ता हथियाने के बाद से ही अराकान आर्मी लड़ रही है और कई इलाकों पर कब्जा कर चुकी है। इस कड़ी में BGP5 बेस पर कब्जा अराकान आर्मी की सबसे बड़ी जीत है। इससे सेना की स्थिति काफी कमजोर हो गई है और विद्रोही गुट का प्रभाव बढ़ गया है। BGP5 बेस म्यांमार सेना के लिए रखाइन राज्य में आखिरी गढ़ था। एए ने इस बेस पर कई महीनों से घेराबंदी कर रखी थी और भीषण हमले के बाद आखिरकार कब्जा कर लिया। रोहिंग्या बहुल इलाके में बना यह बेस लगभग 20 हेक्टेयर में फैला है।

बेस के चारों ओर खोदी गई थी खाई
म्यांमार की जुंटा सेना ने BGP5 बेस को सेना ने बहुत मजबूत बनाया था। बेस के चारों ओर गहरी खाई खोदी गई थीं और कीलें लगाई थीं। इसमें कई बंकर और एक हजार से ज्यादा बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं। लंबी लड़ाई के बावजूद सेना इस बेस को सुरक्षित नहीं रख सकी। जुंटा सेना लगातार एए के सामने हार रही है। उसने एक के बाद एक कई शहर खो दिए हैं लेकिन BGP5 बेस का हाथ से निकल जाना सबसे बड़ा झटका है। पहली बार सेना का पूरी सीमा से नियंत्रण खत्म हुआ है। बांग्लादेश से लगी 270 किलोमीटर लंबी सीमा अब पूरी तरह एए के कब्जे में है।

रखाइन की राजधानी सित्त्वे ही अब सेना के कब्जे में है लेकिन वह भी देश के बाकी हिस्सों से कट चुकी है। इस पर भी एए का कब्जा हो सकता है। ऐसे में एए म्यांमार में किसी राज्य पर पूरा कब्जा करने वाला पहला विद्रोही समूह बन सकता है। जुंटा सेना के नेता जनरल मिन आंग ह्लाइंग के लिए यह बहुत बड़ी हार है।

 

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