वॉशिंगटन
नासा ने अंतरिक्ष में एक एस्टेरॉयड की दिशा बदलने से जुड़े मिशन को हाल ही में अंजाम दिया था। नासा का यह मिशन सफल साबित हुआ था। अंतरिक्ष में स्पेस क्राफ्ट और डॉयमॉर्फोस नाम के एस्टेरॉयड के बीच हुई भीषण टक्कर हुई थी। इस टक्कर से डिमॉर्फोस एस्टेरॉयड से बड़ी मात्रा में पत्थर निकले थे। इससे निकले छोटे-छोटे पत्थरों का विश्लेषण अब वैज्ञानिक कर रहे हैं। 26 सितंबर को यह टक्कर हुई थी, जिसमें से लगभग 10 लाख किग्रा पत्थर और धूल अंतरिक्ष में फैल गई थी।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जितना पत्थर और धूल अंतरिक्ष में फैला है वह मालगाड़ी के सात डिब्बों को भरने के लिए काफी है। टक्कर के बाद अब वैज्ञानिक पता लगा रहे हैं कि पृथ्वी को बचाने वाली इस तकनीक का उपयोग भविष्य में कैसे किया जा सकता है? वैज्ञानिकों की योजना है कि अगर भविष्य में कभी कोई बड़ा एस्टेरॉयड धरती की ओर आता है तो इसी तकनीक से उसका रास्ता बदला जा सकेगा। हालांकि जिस एस्टेरॉयड से टक्कर हुई थी वह पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं है।
टक्कर तो बस शुरुआत है
नए निष्कर्षों की तस्वीरें गुरुवार को शिकागो में अमेरिकी भूभौतिकीय संघ की बैठक में शेयर की गई हैं। नासा में डार्ट कार्यक्रम वैज्ञानिक टॉम स्टेटलर ने एक बयान में कहा, ‘डार्ट मिशन से हम वह चीजें सीख सकते हैं जो हमारे सौर मंडल में एस्टेरॉयड और अन्य छोटे पिंडों को समझने के लिए नासा के व्यापक कार्य का हिस्सा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘एस्टेरॉयड की दिशा मोड़ना तो बस शुरुआत है। टक्कर के बाद अब हम यह पता लगाने में लगे हैं कि यह पिंड किस चीज से बने हैं और कैसे बने हैं? साथ ही अगर ग्रह की ओर कोई एस्टेरॉयड आता है तो उससे कैसे बचाएं।’
क्या खोज रहे हैं वैज्ञानिक
नासा का स्पेस क्राफ्ट 22,500 किमी प्रति घंटे की स्पीड से एस्टेरॉयड से टकराया था। टक्कर के बाद अंतरिक्ष और जमीन पर मौजूद दूरबीनों ने तस्वीरें खींची हैं। इससे यह जानने में मदद मिल रही है कि टक्कर के बाद आखिर क्या हुआ। इस टक्कर के बाद एस्टेरॉयड पर मौजूद छोटे-छोटे पत्थर उछल गए थे। भले ही यह सामान्य घटना लगे, लेकिन वैज्ञानिक गणना कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी विशेष आकार के एस्टेरॉयड कि दिशा बदलने के लिए कितनी जोरदार टक्कर करनी होगी।
