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Friday, March 27, 2026
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जापान के आसमान में थी उत्तर कोरिया की मिसाइल, तो क्यों नहीं मार गिराया? कमांडर ने बताई वजह

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टोक्यो

उत्तर कोरिया की ह्वासोंग-12 मिसाइल चंद दिनों पहले जापान के ऊपर से गुजरी थी। इस कारण जापान में खतरे के सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागना पड़ा। जापान में मिसाइल की चेतावनी के कारण ट्रेनों की आवाजाही को भी रोक दिया गया था। इस घटना के बाद जापान ने कड़ा विरोध जताते हुए उत्तर कोरिया को कड़ी चेतावनी जारी की थी। जापान ने तत्काल ही अपने एयर डिफेंस सिस्टम को भी एक्टिवेट कर दिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जापान ने इस मिसाइल को इंटरसेप्ट कर क्यों नहीं मार गिराया। हालांकि, जापान ने अमेरिका के साथ मिलकर तत्काल ही एयर डिफेंस एक्सरसाइज जरूर शुरू कर दी थी। अमेरिका ने भी जापान का साथ देने के लिए अपने एयरक्राफ्ट कैरियर यूएएस रोनाल्ड रीगन को अपने कैरियर बैटल ग्रुप के साथ तैनात कर दिया है। जापान ने भी अपने लड़ाकू विमानों की गश्त को भी काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।

अमेरिकी एयर डिफेंस कमांडेंट ने बताई बारीकी
डिफेंस वेबसाइट द वार जोन से बात करते हुए अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्लन और आर्मी एयर डिफेंस आर्टिलरी स्कूल के पूर्व कमांडेंट डेविड शैंक ने कहा कि किसी इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की क्षमता होना एक बात है। लेकिन वास्तव में उत्तर कोरिया के लॉन्च किए गए मिसाइल पर एक इंटरसेप्टर को फायर करना, कुछ ऐसा होता जो पहले कभी नहीं हुआ है। इससे बहुत सारे मुद्दे उठने लगते, जिनके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। मिसाइल डिफेंस पर नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक पॉलिसी के सह-लेखक शैंक ने कहा कि मेरी राय में, प्रशांत महासागर में गिरने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने का कोई कारण नहीं है। शैंक ने कहा कि अंतरिक्ष, समुद्र और जमीन पर मौजूद रडार और अन्य सेंसर इस तरह के प्रक्षेपण का जल्दी से पता लगा लेते हैं और इसके सामान्य प्रक्षेपवक्र और ऊंचाई को निर्धारित कर सकते हैं।

जापान ने इसलिए उत्तर कोरिया की मिसाइल को नहीं गिराया
उन्होंने बताया कि एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के प्रक्षेपवक्र और ऊंचाई को काफी जल्दी, पहले पांच मिनट के भीतर पहचाना जा सकता है। रडार और दूसरे सेंसर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित होते हैं और बैलिस्टिक मिसाइल के ट्रैक को अपडेट करते हैं। ऐसे में मिसाइल कहां गिरने वाली है, इसका पता भी चंद मिनटों के अंदर चल जाता है। ऐसे में अगर मिसाइल से कोई खतरा न हो और वह मुख्य भूमि पर न गिर रही हो तो उसको इंगेज करने के लिए इंटरसेप्टर को फायर करना कोई भी होशियारी नहीं है। इंटरसेप्टर मिसाइलें काफी महंगी होती हैं, उनका मुख्य काम दुश्मन देश की मिसाइलों को हवा में मार गिराना है, जिससे जमीन पर तबाही न मच सके। ऐसे में कहीं दूर समुद्र में गिरने वाली मिसाइल को मारकर लाखों डॉलर की मिसाइल को बर्बाद करना बुद्धिमानी नहीं होगी।

जापान ने मिसाइल पर बना रखी थी करीबी निगाह
जापान के रक्षा मंत्री यासुकाजू हमदा ने बताया था कि उत्तर कोरिया के सोमवार को उनके देश के ऊपर से मिसाइल फायर की थी। यह मिसाइल टोक्यो के समयानुसार सुबह 7:22 बजे लॉन्च की गई , जो लगभग 22 मिनट तक हवा में रही। उत्तर कोरिया की ह्वासोंग-12 मिसाइल ने लगभग 1,000 किमी की अधिकतम ऊंचाई पर लगभग 4,600 किमी की उड़ान भरी। यह मिसाइल सुबह 7:28 पर जापान के आओमोरी प्रांत के ऊपर प्रवेश किया और 7:29 बजे गुजर गया। बाद में अनुमान लगाया गया कि उत्तर कोरिया की यह मिसाइल सुबह 7:44 तक जापान के अनन्य आर्थिक क्षेत्र से बाहर निकल गई। रक्षा मंत्री हमदा ने बताया कि इस दौरान उत्तर कोरिया की मिसाइल को इंगेज नहीं किया गया क्योंकि जापानी सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस के विभिन्न रडार ने पुष्टि की थी कि इसके जापान में गिरने का कोई खतरा नहीं है।

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