इस्लामाबाद
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अपने सरकारी कर्मचारियों की 10 फीसदी सैलरी काटने पर विचार कर रही है। पाकिस्तान का सरकारी खजाना खाली हो गया है और शहबाज शरीफ दुनियाभर से कर्ज की गुहार लगा रहे हैं। इस बीच शहबाज शरीफ के अध्यक्षता वाली पाकिस्तान की एक समिति सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 10 फीसदी की कमी करने समेत कई उपायों पर विचार कर रही है। इस बीच शहबाज सरकार ने यह भी कहा है कि वह आईएमएफ से लोन के लिए गुहार लगाएगी।
द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावों के मुताबिक मंत्रालयों और डिविजनों के खर्च में 15 फीसदी की कमी की जाएगी। इसके अलावा कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, सलाहकारों की संख्या को 78 से घटाकर 30 किया जाएगा। इन सिफारिशों को बुधवार को अंतिम रूप दिया गया। अब यह कमिटी पीएम शहबाज शरीफ को अपनी रिपोर्ट भेजेगी। एक सूत्र ने कहा कि इन मंत्रियों और सलाहकारों की संख्या को 30 किया जाएगा। जो मंत्री बचे रहेंगे उनके लिए यह भी संभव होगा कि राष्ट्रीय खजाने से पैसा नहीं दिया जाए।
शहबाज सरकार यह कदम तब उठा रही है जब वह आईएमएफ से कर्ज की गुहार लगा रही है और जल्द ही उसे अगली किश्त के लिए आईएमएफ के दरवाजे पर जाना है। आईएमएफ ने ताजा कर्ज के लिए 7 शर्तें रखी थीं जिसमें सरकारी खर्च को घटाना भी शामिल है। शहबाज सरकार आईएमएफ की शर्तों को पहले मानने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन अब वह तैयार हो गई है। यह गतिरोध करीब ढाई महीने तक चला। शहबाज सरकार को यह डर सता रहा था कि आईएमएफ की शर्तों को मानने से महंगाई कई गुना बढ़ जाएगी और उनकी सरकार चुनाव में जीत नहीं पाएगी।
पाकिस्तान सरकार जहां सरकारी कर्मचारियों की सैलरी काटने जा रही है, वहीं विभिन्न मंत्रालयों की संख्या को घटाने पर कोई काम नहीं कर रही है। वह भी तब जब कई मंत्रालय तो एक ही काम करते हैं। पाकिस्तानी अखबार ने बताया कि शहबाज सरकार में कई ऐसे मंत्रालय हैं जो एक ही काम को करते हैं। इसीलिए कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार को केवल 5 य 6 मंत्रालयों में ही समेट देना चाहिए। इसमें रक्षा, विदेश, वित्त और सुरक्षा शामिल हैं। इसके अलावा अन्य सभी मंत्रालयों को खत्म कर देना चाहिए। इसके अलावा कमिटी ने सुझाव दिया है कि आईएसआई के बजट में भी कमी की जाएगी।
