वॉशिंगटन:
भारत और पाकिस्तान में सीजफायर हो चुका है, जिसके बाद माना जा रहा है कि एक बड़ा संघर्ष टल गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर की घोषणा की है। हालांकि इस सीजफायर पर कई सवाल उठ रहे हैं लेकिन अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा है कि ‘अगर अमेरिका का समर्थन नहीं होता तो पाकिस्तान पिछले 75 सालों से भारत का सामना नहीं कर पाता।’ इसके अलावा उन्होंने ये भी माना कि “अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कई तरह की गलतफहमियां और गलत धारणाएं थीं, लेकिन अमेरिकी सहायता ने पाकिस्तान को भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया।”
हुसैन हक्कानी के बयान से साफ पता चलता है कि अमेरिका ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं को विस्तार देने में कितनी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान को अब अपनी विदेश नीति और रणनीतिक साझेदारियों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है, खासकर भारत के साथ संबंधों के संदर्भ में। हक्कानी के मुताबिक, “पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को फिर से परिभाषित करने और भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से समझने की आवश्यकता है।” हुसैन हक्कानी के बयान से इंटरनेशनल कम्युनिटी में पाकिस्तान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ संबंधों पर नई बहस को जन्म दिया है।
पाकिस्तान को अतीत में अमेरिका से कितनी सैन्य सहायता मिली?
साल 2000 के बाद की बात की जाए तो अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2002 से लेकर साल 2013 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को 26 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी। जिसमें सैन्य उपकरणों की बिक्री भी शामिल थी। जैसे अमेरिका ने पाकिस्तान को 18 नये एफ-16 लड़ाकू विमान, 8 P-3C ओरियन समुद्री गश्ती विमान, 6,000 TOW एंटी-टैंक मिसाइलें, 500 AMRAAM एयर-टू-एयर मिसाइलें, 6 C-130 ट्रांसपोर्ट विमान, 20 कोबरा अटैक हेलीकॉप्टर और एक पेरी-क्लास मिसाइल फ्रिगेट दी थी। इससे पाकिस्तान को अपनी सैन्य क्षमता को विस्तार देने में काफी मदद मिली। पाकिस्तान ने इन हथियारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया है। खासकर एफ-16 को उसने भारत के खिलाफ हमेशा संघर्ष के दौरान किया है। इस बार भी कई रिपोर्ट्स में दावा किया है कि भारत के खिलाफ उसने एफ-16 लड़ाकू विमान को मैदान में उतारा था। अमेरिका अभी भी एफ-16 की मरम्मत और मेटिंनेंस के लिए अमेरिका को काफी पैसा देता है।
साल 2009 से 2014 के बीच अमेरिका ने ‘केरी लुगर बिल’ के तहत हर साल 1.5 अरब डॉलर की मदद दी। साल 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली लगभग 300 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता को रद्द कर दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।’ 2022 में ट्रंप के पूर्ववर्ती बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर की F-16 फ्लीट मेंटेनेंस सहायता प्रदान की थी, जिसपर भारत ने गहरा एतराज जताया था।
