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चीन की मदद से ब्रिक्स का सदस्य बनना चाहता है पाकिस्तान, पुतिन ने दिया झटका, जानें क्यों भारत कर रहा विरोध

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इस्लामाबाद:

पाकिस्तान ब्रिक्स देशों के समूह में शामिल होना चाहता है, इसके लिए उसकी ओर से इसके लिए बीते साल आधिकारिक तौर पर आवेदन भी किया जा चुका है। पाकिस्तान की नजर इस साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्यता हासिल करने पर है। ये सम्मेलन रूस के कजान शहर में अक्टूबर मे होने जा रहा है। पाकिस्तान के आवेदन को चीन से समर्थन मिल रहा है लेकिन संगठन के दो और स्थायी सदस्यों भारत और रूस का रुख पाकिस्तान के लिए नरम नहीं है। ऐसे में चीन की कोशिश के बावजूद भारत और रूस की वजह से पाकिस्तान की कोशिशें बेकार होती दिख रही हैं।

रूस का रुख खासतौर से अहम है क्योंकि उसके पास इस समय ब्रिक्स प्रेसीडेंसी है। रूस ब्रिक्स में शामिल होने की पाकिस्तान की इच्छा के बारे में उदासीन दिख रहा है। ब्रिक्स का विस्तार 2023 में किया गया है और निकट भविष्य में नए विस्तार की संभावना नहीं है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी नए सदस्य को शामिल करने के किसी भी कदम के लिए मौजूदा सदस्यों के बीच सर्वसम्मति की आवश्यकता होती है। फिलहाल पाकिस्तान की सदस्यत कोई सहमति नहीं है। पाकिस्तान नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह में फिट नहीं बैठता है।

ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40 फीसदी आबादी
ब्रिक्स दुनिया की पांच बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका का समूह है। ब्रिक्स के सदस्य देशों में दुनिया की 40 फीसदी आबादी रहती है और ये देश दुनिया की करीब एक तिहाई अर्थव्यवस्था क प्रतिनिधित्व करते हैं। पाकिस्तान की ख्वाहिश भी इस मजबूत संगठन का हिस्सा बनने की है। पाकिस्तान का ध्यान खासकर चीन और रूस के समर्थन की ओर अधिक है। खासतौर से चीन बीते कुछ साल में पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी बनकर उभरा है। कई साझा प्रोजेक्ट दोनों देशों के बीच चल रहे हैं।

पाकिस्तान अगर ब्रिक्स का सदस्य बनता है, तो चीन के साथ उसके खास रिश्ते को देखते हुए साफ है कि इससे चीन का फायदा ही होगा। चीन का इससे ब्रिक्स में दबदबा बढ़ेगा। भारत से चीन और पाकिस्तान दोनों से ही तनावपूर्ण संबंध दुनिया से छुपे नहीं हैं। चीन और भारत में कई क्षेत्रों में प्रभुत्व के लिए रस्साकशी है। ऐसे में भारत नहीं चाहेगा कि चीन का प्रभुत्व ब्रिक्स में बढ़े और उसकी स्थिति इस संगठन में कमजोर पड़ जाए। ऐसे में भारत जरूर चाहेगा कि पाकिस्तान की स्थायी सदस्यता रोकी जाए।

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