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कभी भारत से ज्यादा तेज दौड़ रही थी पाकिस्तान की इकॉनमी, आज दाने-दाने को मोहताज… क्यों हुआ कंगाल

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नई दिल्ली

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान ने आशंका जताई है कि भारत अगले कुछ घंटे में उस पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान की इकॉनमी ज्यादा दिन तक इस युद्ध को झेलने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान की इकॉनमी खस्ताहाल है। रुपया रसातल में चला गया है और महंगाई आसमान पर पहुंच गई है। देश कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और सरकारी खजाना खाली है। डिफॉल्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर आईएमएफ (IMF) से गुहार लगाई है। पाकिस्तान आज हाथ में कटोरा लेकर पूरी दुनिया में भीख मांग रहा है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पाकिस्तान की इकॉनमी भारत से ज्यादा तेजी से बढ़ रही थी।

भारत ने आजादी के बाद कृषि प्रधान देश के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। लेकिन इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर भी मजबूती से उभरे। सर्विस सेक्टर सबसे तेजी से बढ़ रहा सेक्टर है जिसका इकॉनमी में 60% से अधिक योगदान है। रोजगार में इसकी 28% हिस्सेदारी है। मैन्युफैक्चरिंग अहम सेक्टरों में से एक है और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के जरिए इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।

दूसरी ओर धार्मिक कटटरवाद अस्थिर सरकार, सैन्य तानाशाही, सत्ता के विरोधाभासी केंद्रों और आतंकी संगठनों को समर्थन देने की नीति से पाकिस्तान की इकॉनमी को गहरा झटका लगा है। दुनिया की कोई भी कंपनी वहां कारोबार करने को तैयार नहीं है। देश से उद्योग-धंधे बाहर जा रहे हैं। अब तो पाकिस्तान के नेता भी भारत के सिस्टम का लोहा मानने लगे हैं।

भारत और पाकिस्तान ने 1947 में एक साथ अपनी आर्थिक यात्रा शुरू की थी। दोनों पड़ोसी देश हैं और उनकी साझा विरासत है। यही वजह है कि जब-तब दोनों देशों की तुलना होती रहती है। लेकिन आज भारत काफी आगे निकल चुका है। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे इकॉनमी है और पाकिस्तान फिर डिफॉल्ट होने के कगार पर है। भारत की जीडीपी पाकिस्तान से करीब 10 गुना ज्यादा है। भारत के पास 686.14 अरब डॉलर का विदेशी भंडार है जबकि पाकिस्तान के पास मुश्किल से 15.436 अरब डॉलर बचे हैं।

अलग-अलग रास्ता
आजादी के बाद भारत ने जहां गुट निरपेक्ष आंदोलन का रास्ता चुना, वहीं पाकिस्तान अमेरिका की गोद में जाकर बैठ गया। इसका उसे काफी फायदा भी मिला। साल 1960 में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 83.33 डॉलर थी जबकि तब भारत की पर कैपिटा जीडीपी 82.2 डॉलर थी। 1990 तक भी भारत और पाकिस्तान की जीडीपी करीब एक बराबर 370 डॉलर पर पर्सन थी। यही नहीं कई सोशयो-इकनॉमिक इंडिकेटर्स पर पाकिस्तान भारत से कहीं बेहतर स्थिति में था। लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बदलने शुरू हुए। साल 2007 के बाद से भारत की पर कैपिटा जीडीपी पाकिस्तान से लगातार अधिक बनी हुई है। 2024 में भारत की पर कैपिटा जीडीपी 2,698 डॉलर पहुंच गई जबकि पाकिस्तान की 1588 डॉलर थी।

1960 पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार 0.32 अरब डॉलर था जबकि भारत का फॉरेक्स रिजर्व 0.67 अरब डॉलर था। यानी तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान से करीब दो गुना ज्यादा था। लेकिन अब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान से करीब 45 गुना ज्यादा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 84.54 के स्तर पर है जबकि पाकिस्तान में एक डॉलर की कीमत 280.82 रुपये है। आज भारत दुनिया के कई देशों को आर्थिक मदद दे रहा है जबकि पाकिस्तान कटोरा लेकर दुनियाभर में मदद की गुहार लगा रहा है।

पाकिस्तान पर भारी टाटा
आईएमएफ के मुताबिक भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही इकॉनमी है। हर मोर्चे पर भारत दुनिया में झंडे गाड़ रहा है। भारत आज दुनिया की पांचवी बड़ी इकॉनमी है। साल 2010 में भारत 9वें स्थान पर था। भारत की जीडीपी पाकिस्तान से 10 गुना से ज्यादा बड़ी है। साल 2008 से भारतीय जीडीपी में करीब 150 फीसदी बढ़ोतरी हुई है जबकि इस दौरान पाकिस्तान की जीडीपी करीब 65 फीसदी बढ़ी है। भारत की जीडीपी करीब ट्रिलियन डॉलर है जबकि पाकिस्तान की इकॉनमी करीब 374 अरब डॉलर की है। पाकिस्तान की इकॉनमी पर भारत का टाटा ग्रुप भारी है जिसका मार्केट कैप करीब 400 अरब डॉलर है।

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