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रूस फिलहाल सबसे कमजोर, चीन वापस ले अपनी जमीन… ताइवान के राष्ट्रपति ने दे दी जिनपिंग को चुनौती

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ताइपे

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा है कि चीन सिर्फ उनको ही आंख दिखाता है, जबकि वह रूस से अपनी जमीन वापस नहीं ले पा रहा है। ताइवानी मीडिया के साथ एक इंटरव्यू में लाई ने कहा कि चीन ताइवान पर दावा करता है। चीन को क्षेत्रीय अखंडता के बारे में इतनी ही चिंता है तो उसे 19वीं शताब्दी के आखिर में चीनी राजवंश द्वारा रूस को दी गई से जमीन भी वापस लेनी चाहिए। ताइवान के राष्ट्रपति का ये बयान ऐसे समय आया है जब चीन ने उनके देश के खिलाफ बल प्रयोग के संकेत दिए हैं। खासतौर से लाई चिंग-ते के रुख पर चीन नाराजगी जताता रहा है। लाई को चीन अलगाववादी कहता है।

चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता रहा है। दूसरी ओर ताइवान की सरकार चीन के दावों को खारिज करती रही है। ताइवान की सरकार कहती है कि केवल द्वीप के लोग ही अपना भविष्य तय करने का अधिकार है। रविवार को देर रात आए इंटरव्यू में लाई ने 1858 की ऐगुन संधि का जिक्र किया। इस संधि के तहत चीन ने रूस के सुदूर पूर्व में रूसी साम्राज्य के लिए भूमि के एक विशाल क्षेत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अमूर नदी के साथ वर्तमान सीमा का ज्यादातर हिस्सा बनाता है। चीन के किंग राजवंश ने अपने गिरावट के दौर में मूल रूप से संधि की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था लेकिन दो साल बाद पेकिंग के सम्मेलन में इसकी पुष्टि की गई। इसे चीन 19वीं शताब्दी में विदेशी शक्तियों के साथ असमान संधियों में से एक कहता है।

रूस इस वक्त कमजोर, चीन वापस ले अपनी जमीन
लाई ने कहा, ‘चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता के लिए ताइवान पर कब्जा नहीं करना चाहता है। अगर यह क्षेत्रीय अखंडता के लिए है तो फिर वह रूस के कब्जा से अपनी जमीन को वापस क्यों नहीं लेता है। जिस जमाीन को ऐगुन की संधि में हस्ताक्षर कर चीन ने रूस को दिया था। रूस तो आज के समय में अपने सबसे कमज़ोर दौर में है। ऐसे में चीन किंग शासन के दौरान हस्ताक्षरित ऐगुन की संधि को रूस को याद दिलाते हुए उससे अपनी जमीन वापस मांग ले। चीन ऐसा नहीं करता है तो साफ है कि वह क्षेत्रीय कारणों से ताइवान पर आक्रमण नहीं करना चाहता है।

लाई ने कहा कि चीन वास्तव में ताइवान पर अपने इरादों के साथ जो करना चाहता है, वह नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बदलना है। वह पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में आधिपत्य हासिल करना चाहता है और यही उसका वास्तविक उद्देश्य है। चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने लाई की टिप्पणी के पर जवाब नहीं दिया है। चीन की सरकार का कहना है कि ताइवान प्राचीन काल से ही चीनी क्षेत्र रहा है। किंग ने 1895 में एक अन्य ‘असमान संधि’ में ताइवान को जापान को सौंप दिया और 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय इसे चीनी सरकार को सौंप दिया गया। चार साल बाद ही माओत्से तुंग के कम्युनिस्टों के साथ गृह युद्ध हारने के बाद चीनी सरकार ताइवान से भाग गई।

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