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ऑस्‍ट्रेलिया के पास हिंद महासागर में मिला इंसान जैसा अजीबोगरीब जीव, वैज्ञानिकों के उड़े होश

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पर्थ

हिंद महासागर कई तरह के आश्‍चर्यजनक और रहस्‍यमय तथ्‍यों से भरा हुआ है। साथ ही दुनिया का यह हिस्‍सा संसाधनों की वजह से भी काफी खास है। लेकिन अब इसी हिंद महासागर के सूनसान और निर्जन इलाके के गहरे समंदर में वैज्ञानिकों को हैरान करने वाले जीवों के बारे में पता लगा है। ज्‍वालामुखी के करीब मिलने वाले ये जीव वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए चर्चा का विषय बन गए है। यह अजब-गजब से जीव हिंद महासागर के गहरे हिस्‍से में मिले हैं। म्‍यूजियम विक्‍टोरिया रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के वैज्ञानिकों को बिना आंख वाले जानवर, चमगादड़ जैसी दिखने वाली मछली और छिपकली जैसी मछली जिसके दांत काफी नुकीले थे, मिले हैं।

कैसे मिला इनका पता
डेली स्‍टार रिपोर्ट के मुताबिक ये जीव उस समय मिले जब रिसर्चर्स ऑस्‍ट्रेलिया के सूनसान कोकोज आइलैंड मरीन पार्क में समंदर के नीचे खुदाई का काम कर रहे थे। यह द्वीप 467054 स्‍क्‍वॉयर किलोमीटर तक फैला है। यहां से पर्थ की दूरी 2750 किलोमीटर है और उत्‍तर-पश्चिमी हिस्‍से में पड़ता है। दिलचस्‍प बात है कि यहां से मूंगे के दो द्वीप भी हैं। इसके साथ ही 27 छोटे द्वीप हैं जहां पर सफेद रेत, पाम के पेड़ और कुछ खाड़‍ियां भी हैं। वैज्ञानिकों की टीम ने इससे पहले यहां पर उस समुद्री जीवन का पता लगाया था जिसके बारे में किसी को भी कुछ नहीं मालूम था।

इंसान जैसी मछली
वैज्ञानिक समुद्र की सतह के तीन मील नीचे सैंपल इकट्ठा करने गए थे। उन्‍हें उसी समय जिलेटिन स्किन के साथ एक अंधी ईल मिली है। इसकी आंखें विकसित नहीं हुई हैं। वैज्ञानिकों को यह तीन मील से भी ज्‍यादा की गहराई पर मिली है। वैज्ञानिक इसे हासिल करके काफी खुश हैं। इसके अलावा उन्‍हें लिजर्डफिश मिली है जिसके अंडाशय और वीर्यकोष एक साथ हैं। इसके अलावा उन्‍होंने एक सिर पर आंख वाली चपटी मछली की भी खोज की है। यह बिल्‍कुल इंसान के जैसी नजर आती है।

हर तरह की मछलियां
गहरे समुद्र की बैटफिश भी रिसर्चर्स को मिली हैं जो समुद्र तल पर अपने हाथों जैसे पंखों के सहारे चलती हैं। स्लोन की वाइपरफिश ने वैज्ञानिकों को सबसे ज्‍यादा हैरान किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मछलियां गहरे समुद्र में रहने की आदी हैं। ये मछलियां हर तरह के आकार में मिलती हैं। इनकी आंखें या तो बहुत बड़ी होंगी या फिर होंगी ही नहीं। म्यूजियम विक्टोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख वैज्ञानिक टिम ओहारा ने इस बारे में विस्‍तार से लाइव साइंस को जानकारी दी है।

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