नई दिल्ली
दुनिया में मंदी की आशंका कम हो गई है। आने वाले वर्षों में ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है लेकिन भारत और चीन जैसे देशों के कारण दुनिया मंदी की चपेट में आने से बच सकती है। इस साल भारत की जीडीपी की रफ्तार सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा रहने का अनुमान है। ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के ताजा अनुमानों के मुताबिक इस साल ग्लोबल जीडीपी के 3.1 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है जबकि अगले साल इसकी रफ्तार 2.2 फीसदी रह सकती है। ओईसीडी ने मंदी की आशंका नहीं जताई है लेकिन उसका अनुमान इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) की तुलना में कम है। आईएमएफ ने पिछले महीने कहा था कि इस साल वर्ल्ड इकॉनमी 3.2 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है जबकि अगले साल इसका ग्रोथ रेट 2.7 फीसदी रह सकता है।
ओईसीडी ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण वर्ल्ड इकॉनमी की यह दुर्गति हुई है। इससे ऊर्जा संकट पैदा हुआ और दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो गई। अगले साल ग्रोथ पूरी तरह बड़े एशियाई देशों पर निर्भर होगी। ग्लोबल जीडीपी की ग्रोथ में तीन चौथाई योगदान इन्हीं देशों का होगा। इस साल भारत की इकॉनमी के 6.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है जबकि 2023 में उसकी रफ्तार 5.7 फीसदी रह सकती है। दूसरी ओर चीन की रफ्तार इस साल 3.3 फीसदी और अगले साल 4.6 फीसदी रह सकती है।
अमेरिकी इकॉनमी
दूसरी ओर अमेरिकी इकॉनमी के इस साल 1.8 फीसदी और अगले साल 0.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। 19 यूरोपीय देशों में इस साल इकॉनमी के 3.3 फीसदी और अगले साल 0.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। ओईसीडी के मुताबिक इस साल विकसित देशों में महंगाई नौ फीसदी से ऊपर रह सकती है। अगले साल इसके 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है।
