इस्लामाबाद:
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बुरी तरह पिटने के बाद पाकिस्तानी सेना बौखला गई है। भारत के हाथों शर्मिंदगी उठाने वाली पाकिस्तानी सेना अब बलूचिस्तान में दमन पर उतर आई है। बलोच सूत्रों से पता चला है कि पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। कई क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे बलूचिस्तान में लोगों के बीच संपर्क काटा जा सके और अत्याचार की खबरें बाहर न जा सकें। इसे पाकिस्तानी सेना की चेहरा बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत के हमले के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस की नाकामी और मिसाइल की कमजोरियों पर पाकिस्तानी सेना की पोल खुल चुकी है। पाकिस्तान के अंदर ही सेना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इससे ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में अभियान को तेज कर रही है। भारत के साथ पूर्वी सीमा से सैनिकों को फिर से बलूचिस्तान में भेजा जा रहा है।
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का अत्याचार
सैनिकों की तैनाती पाकिस्तानी सेना के उसी पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें वह दूसरे मोर्च पर नाकाम होने पर बलूचिस्तान में अपनी कार्रवाई तेज करती रही है। इसके पहले 1999 में कारगिल युद्ध, 2019 में बालाकोट हवाई हमले और 2006 में नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद यही हुआ था। हर बार सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियान की आड़ में जबरन लोगों को गायब कर दिया और न्यायेतर हत्याएं की गईं। एक बार फिर अपनी शर्मिंदगी से ध्यान हटाने के लिए बलूचों को सजा देने की तैयारी है।
बलूचिस्तान में आजादी आंदोलन
बीते कुछ समय से बलूचिस्तान में अलगाववाद की मांग काफी तेज हुई है। हाल ही में बलोच कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा की थी। इस बीच बलोच अमेरिकी कांग्रेस के महासचिव रज्जाक बलोच ने दावा किया कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के 70-80 प्रतिशत इलाके पर नियंत्रण खो दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना अब केवल क्वेटा तक ही सीमित रह गई है और डर के मारे सैनिक रात में सड़कों पर गश्त तक नहीं लगा रहे हैं।
