दुबई
भारतीय यात्रियों को दुबई के वीजा रिजेक्शन में हुई बढ़ोतरी ने परेशान कर दिया है। हाल के दिनों भारतीयों का दुबई के लिए वीजा रिजेक्ट होना बढ़ गया है। इसकी वजह दुबई के नए वीजा नियम हैं। दुबई के कड़े वीजा नियमों- खासतौर से दस्तावेजी और वित्तीय आवश्यकताओं के चलते जांच बढ़ गई है। इसके नतीजे में वीजा रिजेक्शन की दर भी बढ़ गई है। इसका असर ये हुआ है कि दुबई के लिए हर 100 वीजा आवेदनों में पांच से छह आवेदन रिजेक्ट किए जा रहे हैं।
वीजा के दुरुपयोग को रोकने और आव्रजन कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यूएई ने आवेदन नियमों में बदलाव किए हैं। इन नियमों के तहत आवेदक को ठहरने के प्रमाण, वापसी टिकट और न्यूनतम बैंक बैलेंस सहित अन्य मानदंडों पर पूरी जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा जो लोग दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं, उन्हें अपने मेजबानों से अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे, जैसे कि किराये के समझौते, यूएई आईडी और निवास वीजा। इससे भारतीय यात्रियों को दुबई में एंट्री करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस भी जरूरी
दुबई के लिए वीजा आवेदक को अपने बैंक खातों में एक न्यूनतम राशि भी रखनी होगी। यह वीजा की अवधि के आधार पर होती है। दो महीने के वीजा के लिए 5,000 दिरहम और तीन महीने के वीजा के लिए 3,000 दिरहम जरूरी हैं। इसके साथ-साथ सख्त दस्तावेज स्कैनिंग प्रक्रिया दुबई की यात्रा को कठिन बनाती है।
कई वीजा आवेदक सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद भी रिजेक्शन की शिकायत कर रहे है। इससे भारतीय यात्रियों के साथ-साथ ट्रैवल एजेंट भी नुकसान उठा रहे हैं। ट्रैवल एजेंट का कहना है कि वीजा रिजेक्शन की संख्या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इससे ना सिर्फ वीजा फीस का नुकसान हो रहा है, बल्कि पहले से बुक फ्लाइट टिकट और होटल बुकिंग का भी नुकसान हो रहा है।
जानकारों का कहना है कि नए नियमों से पहले दुबई के वीजा के लिए रिजेक्शन रेट सिर्फ एक से दो फीसदी था। नए नियमों के लागू होने के बाद रोजाना 100 आवेदनों में से कम से कम 5-6 वीजा पर अस्वीकृति मिल रही है। कन्फर्म फ्लाइट टिकट और होटल में ठहरने का विवरण संलग्न होने पर भी वीजा आवेदन अस्वीकृत हो रहे हैं।
