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चीन को इन दो छोटे से देशों ने दिया बड़ा झटका, उठाया ये कदम

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नई दिल्ली,

ताइवान पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच बाल्टिक क्षेत्र के दो छोटे से देशों ने चीन को बड़ा झटका दिया है. बाल्टिक देश लातविया और एस्टोनिया चीन सहयोग समूह से बाहर निकल गए हैं. लातविया और एस्टोनिया ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि हालांकि, वे वैश्विक व्यवस्था और मानवाधिकारों को बनाए रखते हुए चीन के साथ निर्णायक और व्यावहारिक संबंध जारी रखेंगे. पिछले साल लिथुआनिया भी चीन सहयोग समूह से बाहर निकल गया था.पिछले साल लिथुआनिया और चीन के संबंध उस समय बिगड़ गए थे, जब लिथुआनिया ने ताइवान को अपने यहां दूतावास खोलने की मंजूरी दी थी.

लिथुआनिया ने हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा का भी समर्थन किया था. लिथुआनिया के इस कदम को चीन ने गलत बताते हुए आरोप लगाया कि बाल्टिक नाटो देश वन चाइना पॉलिसी का उल्लंघन कर रहे हैं.क्रोएशिया, बुल्गारिया, चेक गणराज्य, ग्रीस, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया कुछ ऐसे देश हैं, जो अभी भी इस समूह का हिस्सा हैं.

हाल के दिनों में लोकतांत्रिक देश ताइवान पर चीन के बढ़ रहे सैन्य दबाव की आलोचना बढ़ी है. पश्चिमी देश लगातार चीन की आलोचना कर रहे हैं.लातविया के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, चीन समूह में लातविया की सदस्यता मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में हमारे रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है.

लातविया ने रूस को भी आड़े हाथों लिया
लातविया ने चीन के करीबी मित्र राष्ट्र रूस को भी आड़े हाथों लिया. यूक्रेन पर रूस के हमले के मद्देनजर लातविया ने हाल ही में रूस को आतंकवाद प्रायोजित देश घोषित किया. इस संबंध में गुरुवार को लातविया के सांसदों ने प्रस्ताव पारित किया. सांसदों ने अपने बयान में कहा कि हमारी संसद रूस को आतंकवाद के प्रायोजित देश के रूप में मान्यता देती है. सांसदों ने कहा कि वे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए यूक्रेन के नागरिकों के खिलाफ रूस की हिंसा को आतंकवाद का रूप मानते हैं.

उन्होंने यूक्रेन में रूसी कार्रवाई की निंदा की और इसे यूक्रेनी लोगों के खिलाफ लक्षित नरसंहार करार दिया था.बता दें कि चीन, ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है. वह लंबे से कहता रहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो ताइवान को बलपूर्वक चीन में शामिल किया जा सकता है. वहीं, ताइवान खुद को लोकतांत्रिक देश बताता है.

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