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पाकिस्तान के वो मुसलमान, जो बकरीद पर कुर्बानी भी नहीं कर सकते… कट्टरपंथियों ने वीडियो जारी कर दी धमकी

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इस्लामाबाद

ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्योहार पाकिस्तान और दूसरे एशियाई देशों में सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन हजारों साल पुरानी परंपरा के तहत मुस्लिम जानवरों की कुर्बानी करते हैं। ईद उल अजहा पर मुसलमान कुर्बानी को काफी अहमियत देते हैं लेकिन पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों को इससे दूर रहने की धमकी दी जा रही है। पाकिस्तान के पूर्व एक पुलिस अफसर और मौजूदा समय में कट्टरपंथी संगठन तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीएलपी) के सदस्य का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह साफ कह रहा है कि अगर कोई अहमदी ईद पर धार्मिक अनुष्ठान करेगा तो उसकी खैर नहीं है।

इस वीडियो में टीएलपी से जुड़ा ये कट्टरपंथी कह रहा है कि अहमदियों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता है, ऐसे में उनको कुर्बानी का हक नहीं है। अगर अहमदियों ने ईद की रस्में निभाईं और कुर्बानी की तो इसकी जानकारी मुझे दें। उसने लोगों को अपना नंबर देते हुए कहा है कि अगर अहमदियों के कुर्बानी का पता चले तो मुझे इसकी जानकारी दे दें। ऐसा करते हुए आप एक हराम काम को रोकेंगे।

अहमदियों को मुसलमान नहीं मानता पाकिस्तान
पाकिस्तान के संविधान में अहमदिया मुसलमानों को मुस्लिम माना ही नहीं गया है। हालांकि ये समुदाय खुद को मुस्लिम मानता हैं। पाकिस्तान के कानून में इनको गैर-मुस्लिम धार्मिक समुदाय का दर्जा दिया गया है। पाकिस्तान ने संविधान संशोधन के जरिए इन्हें गैर-मुस्लिम घोषित किया था और मस्जिदों में जाने पर पाबंदी लगाई थी। पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोगों की संख्या करीब पांच लाख मानी जाती है और ये अक्सर ही कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। इस समुदाय के लोगों पर अक्सर ही ईश निंदा के आरोप लगाकर इनको प्रताड़ित किया जाता है। अब ईद मनाने से भी इनको रोका जा रहा है।

मुस्लिमों के अहमदिया फिरके की शुरुआत 1880 के दशक में मानी जाती है। पंजाब के लुधियाना के गांव कादियान में अहमदी आंदोलन के साथ शुरुआत हुई थी। इसके संस्‍थापक मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को पैगंबर मोहम्‍मद का अनुयायी और अल्‍लाह की ओर से चुना गया मसीहा घोषित किया था। वहीं मुस्लिमों के बीच ये मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद के बाद कोई नबी नहीं होगा। इसी के चलते इस्लाम के दूसरे फिरकों और अहमदियों में टकराव देखा जाता रहा है।

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