वाशिंगटन:
अमेरिकी हाउस ऑफ रेप्रेसेंटेटिव ने बुधवार को भारी बहुमत से उस विधेयक को मंजूरी दे दी है, जो टिकटॉक को अपने चीनी मालिक से अलग होने या अमेरिका से बैन होने में से एक चुनने के लिए मजबूर करता है। इस विधेयक के पक्ष में 352 सांसदों ने मत दिया, वहीं इसके विपक्ष में सिर्फ 65 वोट पड़े। यह कानून वीडियो-शेयरिंग ऐप के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। निचले सदन से पास होने के बाद अब बिल पर सीनेट में वोटिंग होनी है। सीनेट में अब 170 मिलियन अमेरिकी उपयोगकर्ताओं वाले टिकटॉक ऐप पर फैसला लिया जाएगा। इस विधेयक में कहा गया है कि टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस को 180 दिनों (छह महीने) के भीतर बेचने की आवश्यकता है। ऐसा ना होने पर इस अमेरिका में ऐप्पल और गूगल ऐप स्टोर पर प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन डेस्क पर आने पर आधिकारिक तौर पर “विदेशी शत्रु नियंत्रित अनुप्रयोगों से अमेरिकियों की रक्षा अधिनियम” पर हस्ताक्षर करेंगे। यह राष्ट्रपति को अमेरिका के प्रतिकूल माने जाने वाले किसी देश के नियंत्रण में होने पर अन्य अनुप्रयोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की शक्ति देता है। सार्वजनिक नीति के लिए टिकटॉक के उपाध्यक्ष माइकल बेकरमैन ने कहा है कि सार्वजनिक सुनवाई के लाभ के बिना भी इस नवीनतम कानून को अभूतपूर्व गति से पारित किया जा रहा है, जो गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करता है।
भारत में भी लग चुका बैन
टिकटॉक पर भारत में पहले ही बैन लग चुका है। भारत ने ‘सुरक्षा चिंताओं’ का हवाला देते हुए 2020 में ही टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत ऐसा करने वाले वाले पहले देशों में से एक था। प्रतिबंध के समय भारत में करीब 150 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता थे। भारत के बाद नेपाल ने भी ‘सामाजिक सद्भाव’ पर अपने नकारात्मक प्रयासों का हवाला देते हुए चीन के स्वामित्व वाले टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी थी। भारत और नेपाल के बाद ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, अफगानिस्तान, डेनमार्क, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड और नॉर्वे ने भी टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया है। टिकटॉकपर दुनियाभर के 50 से अधिक देशों में प्रतिबंधित है।
