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मोदी रूस के विक्ट्री डे परेड में क्यों नहीं शामिल होना चाहते, पुतिन का न्योता भारत के लिए कैसे बना जी का जंजाल

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मॉस्को

रूस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 9 मई को आयोजित विक्ट्री डे परेड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इस आमंत्रण की पुष्टि रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन और उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको ने की है। हालांकि, भारत की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। क्रेमलिन ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा था कि उसे अब भी भारत की तरफ से पीएम मोदी के रूस दौरे को लेकर अपडेट का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत पीएम मोदी के रूस दौरे को लेकर इतनी आनाकानी क्यों कर रहा है। ऐसे भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएम मोदी रूस के विक्ट्री डे परेड में शामिल होना नहीं चाहते हैं।

रूस क्यों मनाता है विक्ट्री डे
रूस हर साल द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत विजय की वर्षगांठ मनाता है। इस दिन राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वॉयर पर एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन किया जाता है जिसमें रूस अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करता है। इसी को विक्ट्री डे परेड कहा जाता है। विश्व युद्ध में 2.7 करोड़ सोवियत नागरिक मारे गए थे जो किसी भी देश में होने वाली सबसे अधिक जनहानि थी। इस परेड की शुरुआत सोवियत रूस के प्रसिद्ध नेता जोसेफ स्टालिन ने की थी।

भारत क्यों कर रहा है आनाकानी?
पीएम मोदी को विक्ट्री डे परेड में शामिल होने के लिए रूस का न्योता मिले 10 दिन से ज्यादा समय हो चुका है। इसके बावजूद भारत ने चुप्पी साध रखी है। ऐसा माना जा रहा है कि पीएम मोदी के इस दौरे से आनाकानी करने की प्रमुख वजह रूस की ओर से विक्ट्री डे परेड के लिए दो और राष्ट्राध्यक्षों को दिया गया न्योता हो सकता है। रूस ने इस परेड में पीएम मोदी के अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन को आमंत्रित किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि पीएम मोदी इन दो नेताओं के साथ रूस में मंच को साझा करने के इच्छुक नहीं हैं।

चीन और उत्तर कोरिया से पश्चिमी देश खफा
पश्चिमी देश चीन और उत्तर कोरिया के रूस के साथ रिश्तों को लेकर नाराज हैं। उनका आरोप है कि ये दोनों देश यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की मदद कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों ने पश्चिम के इन आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में पीएम मोदी चीन और उत्तर कोरिया के राष्ट्राध्यक्षों के साथ रूस में मंच साझा कर पश्चिमी देशों की आलोचना का शिकार नहीं बनना चाहते हैं। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुंच सकता है और

भारत को ट्रंप के भी भड़कने का डर
भारत को डर है कि पीएम मोदी के 9 मई के रूस दौरे से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क सकते हैं। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती चार महीनों में ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने भारत-चीन समेत दुनिया के कई देशों पर टैरिफ का ऐलान किया है। वर्तमान में रूस और अमेरिका यूक्रेन में संघर्षविराम पर वार्ता कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई हल नहीं दिख रहा है। ऐसे में आशंका है कि मोदी के रूस दौरे से ट्रंप चिढ़ सकते हैं और मॉस्को में शी जिनपिंग, किम जोंग उन के साथ मौजूदगी को अमेरिका विरोधी करार दे सकते हैं।

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