21.9 C
London
Wednesday, May 27, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयसलमान रुश्दी का द सेटेनिक वर्सेज विवादित क्यों? अयातुल्लाह खुमैनी ने जारी...

सलमान रुश्दी का द सेटेनिक वर्सेज विवादित क्यों? अयातुल्लाह खुमैनी ने जारी किया था मौत का फतवा

Published on

न्यूयॉर्क

भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हमला हुआ है। उन्हें गंभीर हालात में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अभी तक हमले के पीछे की वजह का पता नहीं चल सका है। सलमान रुश्दी अपने उपन्यास द सेटेनिक वर्सेज को लेकर लंबे समय से विवादों के घेरे में रहे हैं। यह किताब आज भी दुनियाभर के कई मुस्लिम देशों में प्रतिबंधित है। उनकी मौत को लेकर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक गुरु अयातुल्लाह अली खुमैनी ने फतवा भी जारी किया था। विवाद के बावजूद ब्रिटेन और अमेरिका में रुश्दी को भरपूर सम्मान और प्रतिष्ठा मिली। उन्हें फ्रांस ने भी कमांडर डी ल’ऑर्ड्रे डेस आर्ट्स एट डेस लेट्रेस नियुक्त किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि द सेटेनिक वर्सेज में ऐसा क्या था, जिसे लेकर कट्टरपंथी उनकी मौत चाहने लगे।

1988 में प्रकाशित हुआ था द सेटेनिक वर्सेज
द सेटेनिक वर्सेज सलमान रुश्दी का चौथा उपन्यास था, जो 1988 में प्रकाशित हुआ। इस किताब ने बाजार में आते ही तहलका मचा दिया। इसे लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दुनियाभर के कई देशों ने इस उपन्यास को तत्काल प्रतिबंधित कर दिया। भारत में भी सलमान रुश्दी की द सेटेनिक वर्सेज उपन्यास पर पाबंदी है। इस उपन्यास की खरीद या बिक्री को पूरी तरह से गैर कानूनी घोषित किया गया है।

रुश्दी पर पैगंबर के अपमान का लगाया गया आरोप
कट्टरपंथियों का दावा है कि इस उपन्यास में सलमान रुश्दी ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। दावा किया गया कि इस किताब का शीर्षक एक विवादित मुस्लिम परंपरा के बारे में है। इसे पढ़ने वालों ने कहा कि सलमान रुश्दी ने अपनी किताब में इस परंपरा को लेकर खुलकर लिखा है। जिसके बाद पूरी दुनिया में इस उपन्यास को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए। दुनियाभर के मुस्लिम धर्मगुरुओं और स्कॉलर्स ने इस उपन्यास पर तत्काल बैन लगाने की मांग की। जिसके बाद द सेटेनिक वर्सेज को प्रतिबंधित कर दिया गया।

खुमैनी ने जारी किया था मौत का फतवा, ट्रांसलेटर की हत्या
इस किताब को लेकर ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्लाह अली खुमैनी ने सलमान रुश्दी के खिलाफ मौत का फतवा जारी किया था। इतना ही नहीं, इस उपन्यास के जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की भी हत्या कर दी गई। इसके अलावा इस उपन्यास के इटैलियन अनुवादक पर भी जानलेवा हमले हुए। कट्टरपंथियों ने इस किताब के पब्लिशर को भी निशाना बनाकर हमला किया था।

Latest articles

अयोध्या बायपास का वह महकता कोना अब वीरान: विकास की भेंट चढ़ा गुप्ता दंपत्ति का 15 साल पुराना ‘सपनों का बगीचा’

भोपाल। आधुनिक विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का बिगड़ना इंसानी भावनाओं को किस...

अयोध्या नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, देर रात हुड़दंग और शराबखोरी करने वाले 14 आदतन अपराधी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

भोपाल। आगामी त्योहारों के मद्देनजर राजधानी में शांति और कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने...

बीएचईएल में 61 नव-नियुक्त आर्टिजन प्रशिक्षुओं का ओरिएंटेशन कार्यक्रम शुरू

हरिद्वार। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) हरिद्वार के मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) द्वारा...

भेल बरखेड़ा में पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि

भोपाल। आधुनिक भारत के निर्माता और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की...

More like this

नीदरलैंड ने लौटाई विरासत, PM मोदी को सौंपीं चोल राजा की 1 हजार साल पुरानी निशानियां, जानें क्या है इनकी खासियत?

एम्सटर्डम। पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए...

सीजफायर तोड़ अमेरिका ने ईरान पर फिर बमबारी की, होर्मुज में 1500 जहाज फंसे

ट्रम्प बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सेना ने ईरान...