अमेरिका के आईवी लीग में शामिल टॉप यूनिवर्सिटीज जैसे संस्थानों में पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में छात्र एडमिशन ले रहे हैं। दूसरी तरफ देश के छोटे कॉलेज और यूनिवर्सिटीज बंद होने की कगार पर खड़े नजर आने लगे हैं। फिलाडेल्फिया के फेडरल रिजर्व बैंक ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगले पांच सालों में अमेरिका में 80 कॉलेज बंद हो सकते हैं। ये देश में बदल रही जनसांख्यिकी, आर्थिक दबाव और पढ़ाई की वैल्यू के बारे में बताता है।
रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में ‘डेमोग्राफिक क्लिफ’ का जिक्र किया गया है। इसका मतलब है कि कॉलेज जाने की उम्र वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट होना। आने वाले सालों में इस गिरावट में और भी ज्यादा इजाफा देखने को मिलने वाला है। ऐसा होने पर बड़ी संख्या में कॉलेज बंद होंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे खराब हालातों में हर साल 80 कॉलेज बंद होने की आशंका है। अगर हालात थोड़े बेहतर भी होते हैं और एडमिशन में थोड़ी गिरावट होती है, फिर भी हर साल 8.1% कॉलेज बंद हो सकते हैं।
एडमिशन में हो रही गिरावट
अमेरिकी कॉलेजों में एडमिशन पहले ही कई सालों से कम हो रहे हैं। ट्यूशन फीस बढ़ती जा रही है और डिग्री पर होने वाले खर्च के बदले उसकी कीमत को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 से 2029 के बीच एडमिशन में 15% की गिरावट हो सकती है। इसकी मुख्य वजह जनसांख्यिकी बदलाव और आर्थिक दबाव जिम्मेदार हैं। एक तरफ बड़ी यूनिवर्सिटीज फल-फूल रही हैं, जबकि दूसरी तरफ कम संसाधनों वाले छोटे कॉलेजों को इन चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
आर्थिक तंगी कॉलेज बंद होने की मुख्य वजह
रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉलेजों के बंद होने की मुख्य वजह उनकी आर्थिक तंगी है। बहुत से कॉलेज घाटे में चल रहे हैं। बढ़ते खर्च को कवर करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं है। रिपोर्ट में 2002 से 2023 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जिससे पहता चलता है कि 100 सबसे ज्यादा जोखिम वाले कॉलेजों में से 84 तीन साल के अंदर बंद हो गए। उनके बंद होने की मुख्य वजह कम सैलरी, कम पैसा मिलना और फीस पर ज्यादा निर्भर होना रहा। छात्रों की कम संख्या ने मुसीबत और बढ़ा दी।
किन कॉलेजों के बंद होने का सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिका में कुछ खास तरह के कॉलेज हैं, जिनके बंद होने का खतरा सबसे ज्यादा है। ‘हिस्टोरिकली ब्लैक कॉलेज एंड यूनिवर्सिटीज’ (HBCUs) और वुमेन कॉलेजों पर बंद होने का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। यहां पर कम संख्या में एंडोमेंट आती है और इनमें पढ़ने के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों की संख्या भी कम है। इसके उलट शहर में मौजूद कॉलेजों को अपनी लोकेशन की वजह से ज्यादा फायदा मिलता है, क्योंकि उनमें पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में छात्र अप्लाई करते हैं।
