ढाका
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद युनूस ने कहा है कि वह अपने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह प्रतिबद्धता बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय खासकर हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमलों के बीच जताई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाया कि बांग्लादेश समावेशी और बहुलवादी लोकतंत्र की ओर संक्रमण सुनिश्चित करने और ऐसा माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें “स्वतंत्र, निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण चुनाव” हो सकें।
‘अमेरिका के खास’ माने जाते हैं मोहम्मद यूनुस
नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने 8 अगस्त को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें संसद भंग होने के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने चुना था। यह फैसला आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के बाद लिया गया था। मोहम्मद यूनुस को खुले तौर पर शेख हसीना विरोधी और अमेरिका समर्थक नेता माना जाता है। उन्होंने नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद राजनीति में भी हाथ आजमाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में वह इससे दूर चले गए थे। बांग्लादेश के राजनीतिक हलको में चर्चा है कि मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के इशारे पर बांग्लादेश की सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया था।
बांग्लादेश में हिंसा ने बिगाड़ा माहौल
बांग्लादेश में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के कारण 5 अगस्त को शेख हसीना भारत भाग गई थीं। उनके देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में अराजकता फैल गई थी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान बांग्लादेशी हिंदुओं को भुगतना पड़ा। पूरे बांग्लादेश में 250 से भी अधिक जगहों पर हिंदुओं के खिलाफ हमले हुए। इन हमलों में हिंदुओं के घरों, दुकानों और दूसरे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। हालात इतने बुरे थे कि पुलिस और प्रशासन अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए कुछ नहीं कर सका। बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस ने कहा कि शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय को 48 जिलों में 278 स्थानों पर हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है।
यूनुस बोले- बांग्लादेश ने देखी ‘दूसरी क्रांति’
84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने अपने देश में राजनीतिक उथल-पुथल और 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा, “आप सभी जानते हैं कि बांग्लादेश ने 5 अगस्त 2024 को एक ‘दूसरी क्रांति’ देखी, जिसमें हमारे बहादुर छात्रों ने बड़े पैमाने पर विद्रोह किया और इसमें आम जनता भी शामिल हुई।” यूनुस ने कहा, “हमारी सरकार समावेशी और बहुलवादी लोकतंत्र में बदलाव सुनिश्चित करने और ऐसा माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें स्वतंत्र, निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण चुनाव हो सकें।”
