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Wednesday, March 25, 2026
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जनवरी के बाद अब फरवरी में भी गर्मी तोड़ेगी रिकॉर्ड? मौसम विभाग ने दिया बड़ा अपडेट

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नई दिल्ली:

जनवरी में गर्म और शुष्क मौसम के बाद फरवरी में स्थिति खास बदलने वाली नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, फरवरी में भी भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और नॉर्मल से कम बारिश की आशंका है। आईएमडी ने बताया कि फरवरी में मौसम गर्म शुष्क रहेगा। देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा और बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में धूप खिलने से पारा ऊपर गया। दिल्ली में 31 जनवरी को तापमान 27 डिग्री पहुंच गया। ये छह सालों का यह सबसे गर्म दिन रहा। एक दिन पहले पारा 26.7 डिग्री था।

फरवरी में भी कम बारिश के आसार : IMD
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि फरवरी में भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। कम बारिश से रबी की फसलों पर असर पड़ सकता है। फरवरी में बारिश सामान्य से 81 फीसदी कम रह सकती है। 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में औसतन 22.7 मिमी बारिश होती है। इस बार इससे भी कम बारिश होने की संभावना है। पश्चिम-मध्य, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों को छोड़कर, देश के ज्यादातर हिस्सों में कम बारिश होगी।

तापमान को लेकर मौसम विभाग ने क्या कहा
तापमान की बात करें तो, उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, अधिकतर इलाकों जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। इसी तरह, पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, ज्यादातर जगहों पर अधिकतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं। इसका मतलब है कि फरवरी में ज्यादा गर्मी पड़ेगी।

जनवरी में कम बारिश और ज्यादा पारे का बना रिकॉर्ड
महापात्रा ने बताया कि जनवरी महीने में भारत में औसतन सिर्फ 4.5 मिमी बारिश हुई। यह 1901 के बाद से चौथी बार और 2001 के बाद से तीसरी बार सबसे कम बारिश है। जनवरी में देश का औसत तापमान 18.98 डिग्री सेल्सियस रहा। यह 1901 के बाद से जनवरी का तीसरा सबसे ज्यादा तापमान है। इससे पहले 1958 और 1990 में जनवरी में इससे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया था।

बदले मौसम का खेती पर कितना होगा असर, समझिए
IMD ने पहले ही बताया था कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश होगी। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में रबी की फसलें उगाई जाती हैं। इनमें गेहूं, मटर, चना और जौ जैसी फसलें शामिल हैं। इन फसलों की बुवाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच होती है और कटाई अप्रैल से जून के बीच। सर्दियों में होने वाली बारिश इन फसलों के लिए जरूरी होती है। यह बारिश मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण होती है। बारिश कम होने से इन फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है।

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