नई दिल्ली
भारत के चंद्रयान ने चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने अपने निर्धारित समय पर चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडिंग की। चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद लैंडर विक्रम सही तरीके से काम कर रहा है। लैंडर विक्रम ने चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के बाद पहली बार तस्वीरें भेजी है। इसरो ने चंद्रमा की सतह से भेजी गई चार तस्वीरों को ट्वीट किया। यह तस्वीरें लैंडर विक्रम के हॉरिजोन्टल वेलोसिटी कैमरा से ली गई हैं। इसके बाद लैंडर ने एक और तस्वीर भेजी है जिसमें वो लैंडिंग साइट दिख रही है, जहां विक्रम चांद पर उतरा है।
खुशी से झूम उठे थे साइंटिस्ट
तस्वीरों को ट्वीट करते हुए इसरो ने लिखा कि Ch-3 लैंडर और MOX-ISTRAC, बेंगलुरु के बीच संचार लिंक स्थापित किया गया है। नीचे उतरते समय ली गई लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरे की तस्वीरें यहां दी गई हैं। इससे पहले चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद बेंगलुरु में इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साइंटिस्ट खुशी से झूम उठे।
चार साल से काम कर रहे थे साइंटिस्ट
चंद्रयान के चंद्रमा पर उतरने के बाद यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक एम. शंकरन ने कहा किलोग चाहते थे कि हम सफल हों। इसरो की चंद्रयान-3 परियोजना टीम ने जबरदस्त प्रयास किया है। वे पिछले चार वर्षों से चंद्रयान-3 पर काम कर रहे हैं। शंकरन ने यह भी कहा कि चंद्रयान-3 टीम को नेविगेशन, प्रोपल्शन और अन्य टीमों का भरपूर सहयोग मिला। उनके अनुसार, इस सफलता ने उन पर और जिम्मेदारी डाल दी है। उन्होंने कहा कि कि पूरा मिशन त्रुटिहीन और समय पर हुआ। चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक पी. वीरमुथुवेल ने कहा, भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब जाने वाला दुनिया का पहला देश है।
चंद्रयान-2 की असफलता से सीख
चंद्रमा लैंडर की सुरक्षित लैंडिंग का जिक्र करते हुए एसोसिएट प्रोजेक्ट डायरेक्टर कल्पना ने कहा कि यह चंद्रयान-3 टीम के लिए सबसे उल्लेखनीय और खुशी का क्षण था। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 की विफलता से सीख लेते हुए टीम ने चंद्रयान-3 बनाने के बाद जो भी लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, उन्हें हासिल कर लिया गया है।
